रांची में बाल पत्रकारों का कॉन्क्लेव: बच्चों ने बाल विवाह, बाल श्रम और जलवायु परिवर्तन पर उठाई आवाज

रांची में बाल पत्रकारों का कॉन्क्लेव: बच्चों ने बाल विवाह, बाल श्रम और जलवायु परिवर्तन पर उठाई आवाज

रांची में ‘वॉइसेज ऑफ चेंज’ कॉन्क्लेव का आयोजन

रांची। बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और सामाजिक समस्याओं पर अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मंगलवार को रांची में ‘वॉइसेज ऑफ चेंज-चाइल्ड रिपोर्टर्स कॉन्क्लेव 2026’ का आयोजन किया गया। यूनिसेफ झारखंड और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बाल पत्रकारों ने अपनी कहानियों, अनुभवों, कविताओं और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से कई अहम सामाजिक मुद्दों को सामने रखा।

कार्यक्रम में बाल विवाह, बाल श्रम, स्कूलों से बच्चों के दूर होने, लैंगिक भेदभाव, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर चर्चा हुई। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

बाल पत्रकारिता से बढ़ेगा बच्चों का आत्मविश्वास

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बाल पत्रकारिता को बच्चों के विकास की दिशा में सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते हैं और उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है। बच्चों को अपनी बात रखने और आसपास की समस्याओं को सामने लाने के लिए उचित मंच मिलना चाहिए।

कॉन्क्लेव में बच्चों की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि उन्हें अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर वे सामाजिक चुनौतियों को पहचानने और उनके समाधान की दिशा में सार्थक भूमिका निभा सकते हैं।

क्या है यूनिसेफ का बाल पत्रकार कार्यक्रम?

बाल पत्रकार कार्यक्रम के तहत स्कूली बच्चों को पत्रकारिता के बुनियादी कौशल सिखाए जाते हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को अपने विद्यालय और समुदाय से जुड़े मुद्दों की पहचान करने, अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने और संबंधित लोगों तक समस्याएं पहुंचाने के लिए तैयार करना है।

झारखंड में यह कार्यक्रम जेईपीसी तथा आदर्श सेवा संस्थान और नव भारत जागृति केंद्र जैसी सहयोगी संस्थाओं के साथ संचालित किया जाता है। इसके माध्यम से बच्चों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, बाल अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और पर्यावरण जैसे विषयों पर जागरूक किया जाता है।

बाल पत्रकारों को समाचार लिखने, साक्षात्कार लेने और समस्याओं को समझकर उन्हें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने जैसे कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाता है। स्कूलों में पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को सामने लाने के लिए भी उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है।

बच्चों ने अनुभवों और कविताओं से उठाए सामाजिक मुद्दे

कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न बाल पत्रकारों ने अलग-अलग विषयों पर अपनी बात रखी। पल्लवी ने बाल अधिकारों और प्रियांशी कुमारी ने जलवायु परिवर्तन पर विचार साझा किए। राजवीर ने बाल अधिकारों पर कविता प्रस्तुत की। वहीं, रिचा कुमारी ने लैंगिक भेदभाव, प्रियांशी बर्दियार ने बाल विवाह और सोनू उरांव ने बाल श्रम से जुड़े अनुभवों को सामने रखा।

इन प्रस्तुतियों के जरिए बच्चों ने समाज में मौजूद चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया और बाल अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया।

नुक्कड़ नाटकों से दिया जागरूकता का संदेश

कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर संदेश दिया। राम लखन सिंह राजकीय विद्यालय, कोकर के विद्यार्थियों ने जलवायु परिवर्तन का बच्चों पर पड़ने वाला प्रभाव प्रस्तुत किया।

राजकीय विद्यालय, दाहू के बच्चों ने शारीरिक बनावट को लेकर होने वाले भेदभाव पर नाटक किया। वहीं, टीयूएसएसवी राजकीय विद्यालय, ओरमांझी के विद्यार्थियों ने गैर-संचारी बीमारियों और स्वस्थ खानपान की आदतों पर प्रस्तुति दी।

इन नाटकों के माध्यम से बच्चों ने सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत का संदेश दिया। कार्यक्रम में जेईपीसी के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन, यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ. कनिका मित्रा और विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *