धनबाद: दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों की भव्य सजावट लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन धनबाद के धनसार में इस बार पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखकर एक अनूठी पहल की गई है। यहां इको-फ्रेंडली थीम पर तैयार पूजा पंडाल को करीब एक लाख पौधों से सजाया गया है। प्राकृतिक हरियाली के बीच सजा यह पंडाल श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के साथ पेड़-पौधों के महत्व का संदेश भी दे रहा है।
हरियाली के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश
आमतौर पर दुर्गा पूजा पंडालों में रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक कलाकृतियां और भव्य सजावट देखने को मिलती है। धनसार के इस पंडाल में पौधों को सजावट का हिस्सा बनाकर अलग पहचान देने की कोशिश की गई है।
पंडाल की हरियाली लोगों को प्रकृति के करीब होने का एहसास कराती है। बढ़ते प्रदूषण और पेड़ों की कटाई जैसी चुनौतियों के बीच यह पहल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने और हरियाली बचाने की जरूरत को रेखांकित करती है।
पूजा समिति ने बताया इको-फ्रेंडली थीम का उद्देश्य
पूजा समिति के सदस्य अमित कुमार ने बताया कि इस बार पंडाल को इको-फ्रेंडली थीम पर तैयार किया गया है और इसकी सजावट में करीब एक लाख पौधों का इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया है। अमित कुमार के अनुसार, पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर असर पड़ता है और ऑक्सीजन की उपलब्धता को लेकर भी चिंताएं बढ़ती हैं। ऐसे में पेड़-पौधों को बचाना बेहद जरूरी है।

श्रद्धालुओं को पसंद आई पौधों से सजे पंडाल की थीम
पंडाल देखने पहुंचीं श्रद्धालु सुष्मिता कुमारी ने कहा कि यह पूजा पंडाल उन्हें बेहद खास लगा। उनके मुताबिक, इस तरह की सजावट से लोगों को समझने का मौका मिलता है कि पेड़-पौधे हमारे जीवन के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।
वहीं, श्रद्धालु तन्नू गुप्ता ने कहा कि मां दुर्गा की प्रतिमा और पंडाल को पेड़-पौधों के साथ सजाने से पर्यावरण संरक्षण का संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी लोग स्वच्छ हवा में सांस ले सकेंगे।
पेड़-पौधों के महत्व को लेकर जागरूकता की पहल
श्रद्धालु राकेश कुमार ने पूजा समिति के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि पंडाल के माध्यम से लोगों को पेड़-पौधों की उपयोगिता समझाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के लिए प्रकृति और हरियाली का संरक्षण जरूरी है।
धनसार का यह पूजा पंडाल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दे रहा है। इसकी थीम लोगों को याद दिलाती है कि त्योहारों की खुशियों के बीच प्रकृति की रक्षा और पौधों का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।

