Dhanbad Durga Puja: हीरापुर के हरि मंदिर और दुर्गा मंदिर में महासप्तमी पर नवपत्रिका स्नान, उमड़े श्रद्धालु

Dhanbad Durga Puja: हीरापुर के हरि मंदिर और दुर्गा मंदिर में महासप्तमी पर नवपत्रिका स्नान, उमड़े श्रद्धालु

धनबाद में महासप्तमी पर नवपत्रिका स्नान का आयोजन

धनबाद: दुर्गा पूजा के अवसर पर हीरापुर स्थित हरि मंदिर और बंगाली कल्याण समिति के दुर्गा मंदिर में महासप्तमी के मौके पर नवपत्रिका स्नान का आयोजन किया गया। सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां दुर्गा की पूजा की तैयारियां की गईं।

स्नान के बाद मंदिर पहुंचीं मां, होगी कलश स्थापना

मंदिर प्रबंधन से जुड़े एक व्यक्ति ने मीडिया को बताया कि महासप्तमी के दिन नवपत्रिका और कलश से संबंधित पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि मां को घाट पर स्नान कराने के बाद मंदिर लाया गया, जहां दोबारा स्नान की परंपरा पूरी कर कलश स्थापना की जाएगी।

इस अवसर पर हरि मंदिर की ओर से सभी श्रद्धालुओं को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं भी दी गईं।

सुबह कोलाबऊ लेकर पहुंचे श्रद्धालु

एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि महासप्तमी की पूजा के लिए वे सुबह ही कोलाबऊ लेकर मंदिर पहुंचीं। उनके अनुसार, षष्ठी से पूजा की गतिविधियां शुरू हो गई थीं और महासप्तमी पर पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी।

उन्होंने बताया कि श्रद्धालु पूजा में शामिल होकर अंजलि और पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद भोग वितरण और संध्या आरती का आयोजन होगा।

सप्तमी और अष्टमी की पूजा को लेकर उत्साह

महिला श्रद्धालु ने बताया कि इस वर्ष पूजा के कैलेंडर में सप्तमी की तिथि दो दिन पड़ने के कारण पूजा कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। उन्होंने कहा कि अष्टमी की सुबह भी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद नवमी की पूजा और दशमी को विसर्जन की परंपरा पूरी होगी।

पूजा-अर्चना और संध्या आरती में शामिल होंगे श्रद्धालु

महासप्तमी के अवसर पर मंदिरों में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पुष्पांजलि, भोग वितरण और संध्या आरती के माध्यम से भक्त मां दुर्गा की आराधना करेंगे। हीरापुर के दोनों पूजा स्थलों पर धार्मिक माहौल बना हुआ है।

नोट: समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी और श्रद्धालुओं के बयानों पर आधारित है। तिथि और अनुष्ठानों के विवरण को संबंधित पूजा समिति से सत्यापित किया जा सकता है।

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