पाकुड़ डीसी के नाम और तस्वीर का दुरुपयोग
पाकुड़: जिले की उपायुक्त मेघा भारद्वाज के नाम और तस्वीर का दुरुपयोग कर साइबर अपराधियों द्वारा एक फर्जी व्हाट्सएप आईडी बनाए जाने का मामला सामने आया है। इस फर्जी अकाउंट के माध्यम से जिले के अधिकारियों और अन्य लोगों से कथित तौर पर पैसे और उपहार की मांग की जा रही है।
जिला जनसंपर्क कार्यालय की ओर से 16 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 1032 में इस मामले की जानकारी दी गई। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित व्हाट्सएप नंबर का उपायुक्त या जिला प्रशासन से कोई संबंध नहीं है।
फर्जी नंबर से संपर्क कर मांगी जा रही राशि
प्रशासन के अनुसार, साइबर अपराधियों ने उपायुक्त की पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाया है। इसके माध्यम से अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों से संपर्क कर राशि एवं उपहार मांगने का मामला सामने आया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह साइबर ठगी का प्रयास है। लोगों को ऐसे संदेशों पर भरोसा करने से बचने और किसी भी तरह का भुगतान नहीं करने की सलाह दी गई है।
पुलिस को दी गई सूचना, जांच जारी
इस मामले की सूचना पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक को उपलब्ध करा दी गई है। जिला प्रशासन के मुताबिक, पुलिस मामले की जांच कर रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन ने अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, शुभचिंतकों और आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उपायुक्त के नाम से किसी संदिग्ध नंबर या अनधिकृत सोशल मीडिया अकाउंट से संदेश या कॉल आए, तो पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
जिला प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध संदेश पर तुरंत विश्वास नहीं करने की अपील की है। साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- किसी अनजान या संदिग्ध नंबर पर पैसे ट्रांसफर न करें।
- पैसे या उपहार की मांग करने वाले संदेश की आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।
- बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
- संदिग्ध कॉल या संदेश मिलने पर निकटतम पुलिस थाना या साइबर पुलिस को सूचना दें।
- किसी अधिकारी के नाम और तस्वीर वाले अकाउंट को वास्तविक मानने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचें।
जिला प्रशासन ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
पाकुड़ जिला प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों से बचने और किसी भी अनधिकृत संदेश पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करने का आग्रह किया है।
प्रशासन का कहना है कि संदिग्ध गतिविधियों की समय पर सूचना देने से साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिल सकती है। अधिकारियों और आम नागरिकों को ऐसे मामलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

