मुंबई, 15 अक्टूबर 2026। भारत के संभावित सबसे बड़े आईपीओ से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपनी भविष्य की विकास रणनीति का रोडमैप पेश किया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने मोबिलिटी, होम ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज-इंटरनेशनल कारोबार को जियो के तीन प्रमुख ग्रोथ इंजन बताया। कंपनी का लक्ष्य अपनी डिजिटल सेवाओं और तकनीकी क्षमताओं के विस्तार के जरिए भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाना है।
आकाश अंबानी ने कहा कि जियो की कारोबारी रणनीति के केंद्र में ग्राहक हैं। कंपनी का जोर हर भारतीय, हर घर और हर उद्यम तक बेहतर तथा किफायती डिजिटल सेवाएं पहुंचाने पर रहेगा।
IPO से पहले जियो ने पेश की विकास रणनीति
कंपनी के अनुसार, जियो के पास करीब 53.3 करोड़ कनेक्टिविटी ग्राहक हैं और वह भारत के 60 प्रतिशत से अधिक डेटा ट्रैफिक को संभालती है। जियो का मानना है कि उसका मौजूदा ग्राहक आधार, डिजिटल नेटवर्क और तकनीकी बुनियादी ढांचा भविष्य में कारोबार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2031 तक भारत की लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत करने की संभावना जताई है। यह कंपनी की भविष्य की कारोबारी रणनीति और बाजार संबंधी अनुमान का हिस्सा है।
मोबिलिटी कारोबार में 34 करोड़ नए ग्राहकों की संभावना
आकाश अंबानी के मुताबिक, अगले पांच वर्षों में भारत के मोबाइल बाजार में करीब 34 करोड़ नए 4G और 5G ग्राहकों की संभावना है। इसमें लगभग 10 करोड़ ऐसे लोग शामिल हो सकते हैं, जो पहली बार मोबाइल कनेक्शन लेंगे। वहीं, करीब 24 करोड़ ग्राहक 2G से 4G और 5G नेटवर्क पर जा सकते हैं।
कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में जियो के शुद्ध सक्रिय मोबाइल ग्राहकों की वृद्धि दूसरे सबसे बड़े ऑपरेटर की तुलना में लगभग तीन गुना रही। कंपनी इस संभावित बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
होम ब्रॉडबैंड को 10 करोड़ घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य
जियो की रणनीति में होम ब्रॉडबैंड एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी के पास फिलहाल करीब 2.86 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहक हैं और उसका लक्ष्य इस आधार को बढ़ाकर 10 करोड़ घरों तक पहुंचाना है।
कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश में जुड़े कुल नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शनों में जियो की हिस्सेदारी करीब 67.5 प्रतिशत रही। जियो फाइबर और वायरलेस तकनीक के जरिए अपनी सेवाओं का विस्तार लगभग 19,000 पिन कोड तक करने की दिशा में काम कर रहा है।
एंटरप्राइज और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी नजर
जियो का तीसरा ग्रोथ इंजन एंटरप्राइज डिजिटल सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय कारोबार है। कंपनी भारत में एंटरप्राइज डिजिटल सर्विसेज के बाजार का आकार करीब 5.1 लाख करोड़ रुपये यानी 56.8 अरब डॉलर आंकती है।
आकाश अंबानी के अनुसार, देश की लगभग 65 प्रतिशत बैंक शाखाएं जियो नेटवर्क से जुड़ी हैं। कंपनी कारोबारों को डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने के अवसरों पर भी ध्यान दे रही है।
भारतीय तकनीक को वैश्विक बाजार में पहुंचाने की तैयारी
जियो अपनी विकसित एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी स्टैक को चुनिंदा विदेशी बाजारों में पेश करने की योजना बना रहा है। कंपनी का इरादा केवल सॉफ्टवेयर बेचने तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक टेलीकॉम कंपनियों के साथ प्रबंधित सेवा साझेदार के रूप में काम करने का है।
कंपनी के मुताबिक, यह रणनीति भारतीय तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने और भारत को तकनीक के आयातक के साथ-साथ निर्यातक के रूप में स्थापित करने में योगदान दे सकती है।
ईशा अंबानी ने दीर्घकालिक कारोबारी सोच पर दिया जोर
कार्यक्रम में ईशा अंबानी ने जियो की शुरुआत और रिलायंस की कारोबारी सोच का उल्लेख किया। उन्होंने दीर्घकालिक योजना, बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता, प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय अनुशासन को कंपनी की रणनीति के महत्वपूर्ण आधारों के रूप में रेखांकित किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत उदय कोटक ने रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी और वर्ष 1977 के रिलायंस आईपीओ को याद करते हुए की।
निष्कर्ष: जियो की घोषित रणनीति मोबाइल कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर होम ब्रॉडबैंड, उद्यम डिजिटल सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कारोबार में विस्तार करने की है। हालांकि, इन लक्ष्यों की वास्तविक प्रगति कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
संपादकीय नोट: आईपीओ के आकार और समयसीमा से जुड़े दावों को आधिकारिक कंपनी या नियामकीय दस्तावेजों से सत्यापित करें। यहां दिए गए ग्राहक आंकड़े, बाजार अनुमान और विस्तार लक्ष्य उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं।

