पाकुड़। दुर्गापूजा के अवसर पर राजापाड़ा स्थित सिंघवाहिनी मंदिर परिसर में कलाकृति केंद्र की ओर से चित्रांकन कार्यक्रम, माला बनाओ प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सर्व भारतीय कल्चरल क्रिएटिव फाउंडेशन के सौजन्य से अंशु कला केंद्र के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में चित्रकला, फूलों से माला बनाने और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया गया।
माला बनाओ प्रतियोगिता में अनु मंडल ने हासिल किया पहला स्थान
माला बनाओ प्रतियोगिता में बच्चों ने फूलों से आकर्षक मालाएं बनाकर अपनी कल्पनाशीलता और हुनर का परिचय दिया। प्रतियोगिता में अनु मंडल ने प्रथम, नम्रता पांडे ने द्वितीय और खुशबू कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

बच्चों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों की रचनात्मक क्षमता को मंच प्रदान करना रहा।
गणेश वंदना और मां दुर्गा पर आधारित नृत्य ने मोहा मन
कार्यक्रम की शुरुआत ऋषिता कर्मकार की गणेश वंदना से हुई। इसके बाद कलाकृति केंद्र के बच्चों ने मां दुर्गा पर आधारित समूह नृत्य प्रस्तुत किया। आकर्षक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए बच्चों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिली।
रूमा सिंह ने बताया कलाकृति केंद्र का उद्देश्य
कलाकृति केंद्र की संचालिका रूमा सिंह ने कहा कि केंद्र का उद्देश्य बच्चों को केवल नृत्य और चित्रकला सिखाना नहीं है, बल्कि उनमें अच्छे विचार, संस्कार और रचनात्मकता के गुण विकसित करना भी है।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं और उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करते हैं।
ज्योति मंडल और नीलम कुमारी को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करने वाली ज्योति मंडल और नीलम कुमारी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। दोनों ने कलाकृति केंद्र से मेहंदी का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पेशेवर मेहंदी डिजाइनर के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
आज दोनों आत्मनिर्भर होकर काम कर रही हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों की कलात्मक प्रतिभा, भारतीय संस्कृति और महिलाओं की आत्मनिर्भरता का संदेश दिया गया।

