IIT ISM के प्रो. अजय मंडल को Enhanced Oil Recovery में विश्व स्तर पर छठी रैंक

IIT ISM के प्रो. अजय मंडल को Enhanced Oil Recovery में विश्व स्तर पर छठी रैंक

धनबाद, 8 अक्टूबर। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर (एचएजी) एवं पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अजय मंडल को Enhanced Oil Recovery के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और पहचान मिली है। 2026 Top1000 Scholar Ranking के तहत जारी Verified Ranking Certificate में उन्हें Enhanced Oil Recovery Techniques के क्षेत्र में दुनिया में छठा स्थान मिला है। इसी विषय में World Top1000 के बीच उन्हें भारत में नंबर-1 रैंक दी गई है।

Ranking Certificate में दर्ज हैं ये आंकड़े

जारी प्रमाणपत्र के अनुसार, Lifetime Impact Window में प्रो. अजय मंडल का Impact Score 99.78 दर्ज किया गया है। उनका Statistical Percentile Top 0.02 प्रतिशत है। वहीं, Category D-Index 63 और H-Index 72 दर्ज किया गया है।

ये आंकड़े उनके लंबे समय से किए जा रहे शोध कार्य और उसके प्रभाव को दर्शाते हैं। Enhanced Oil Recovery के क्षेत्र में उनका शोध तेल की रिकवरी बढ़ाने से जुड़ी तकनीकों और ऊर्जा क्षेत्र में उनके उपयोग पर केंद्रित रहा है।

ScholarGPS से भी मिल चुकी है अंतरराष्ट्रीय पहचान

प्रो. अजय मंडल को 2026 में ScholarGPS की ओर से Highly Ranked Scholar–Lifetime के रूप में भी मान्यता मिली थी। उन्हें Petroleum Engineering और Enhanced Oil Recovery के क्षेत्र में दुनिया के Top 0.05 प्रतिशत Scholars में शामिल किया गया था।

इससे पहले मिली यह पहचान उनके शोध कार्य की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और प्रभाव को रेखांकित करती है।

जून में मिला था Chartered Chemist का प्रतिष्ठित स्टेटस

जून 2026 में प्रो. अजय मंडल को Royal Society of Chemistry, UK की ओर से Chartered Chemist (CChem) Status भी मिला था। यह उपलब्धि उनके शोध और पेशेवर योगदान से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पहचान के रूप में सामने आई।

Enhanced Oil Recovery से Energy Technology तक रिसर्च

प्रो. मंडल का शोध कार्य Enhanced Oil Recovery के अलावा Nanoemulsion, Surfactant-Based Oil Recovery, Carbon Utilization and Storage और Energy Technology जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।

Enhanced Oil Recovery में दुनिया में छठी रैंक और भारत में नंबर-1 स्थान की यह पहचान उनके लंबे समय से चल रहे शोध कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली एक और महत्वपूर्ण मान्यता है।

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