बांकुड़ा: लंबे समय से बेटी के घर लौटने का इंतजार कर रही बेलपहाड़ी के जामिरडीहा गांव की लुलकी महतो को अब उम्मीद जगी है। उनकी बेटी जबा महतो ने बुधवार को बांकुड़ा जिला पुलिस के सामने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। बेटी के आत्मसमर्पण की खबर मिलने के बाद परिवार में राहत का माहौल है।
जबा महतो बेलपहाड़ी के बांसपहाड़ी इलाके के जामिरडीहा गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने बांकुड़ा पुलिस लाइन में राज्य पुलिस के एडीजी आनंद कुमार के सामने आत्मसमर्पण किया। जानकारी के अनुसार, उनके साथ दो अन्य माओवादी नेता-नेत्री ने भी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है।
सशस्त्र आंदोलन का रास्ता छोड़ने का फैसला
आत्मसमर्पण के बाद जबा महतो ने कहा कि उन्होंने सशस्त्र आंदोलन का रास्ता छोड़कर शांति और सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए यह फैसला लिया है। उन्होंने विकास कार्यों से जुड़कर अपने जीवन की नई शुरुआत करने की इच्छा भी जताई।
जबा ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीति पर भी भरोसा जताया। आत्मसमर्पण के बाद अब उनके पुनर्वास और आगे की प्रक्रिया को लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बेटी के आत्मसमर्पण की खबर से परिवार में राहत
जबा के आत्मसमर्पण की खबर जामिरडीहा गांव स्थित उनके परिवार तक पहुंची तो परिजनों ने राहत की सांस ली। सबसे ज्यादा खुशी उनकी मां लुलकी महतो को हुई, जो लंबे समय से बेटी के लौटने का इंतजार कर रही थीं।
बेटी के आत्मसमर्पण के बाद मां को उम्मीद है कि दुर्गापूजा से पहले जबा घर वापस लौट सकती हैं। लंबे समय बाद बेटी को अपने पास देखकर उसके लिए अपने हाथों से पसंद का खाना बनाने और खिलाने की इच्छा मां ने जताई है।
दुर्गापूजा से पहले बेटी के लौटने का इंतजार
बेटी के घर लौटने की उम्मीद में लुलकी महतो अब दिन गिन रही हैं। लंबे समय से परिवार से दूर रही जबा के वापस आने की खबर ने घर में एक नई उम्मीद पैदा की है।
अब परिवार को इंतजार है कि आत्मसमर्पण के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद जबा कब घर लौटती हैं। मां की नजरें इसी उम्मीद पर टिकी हैं कि इस बार दुर्गापूजा बेटी के साथ घर में मनाने का मौका मिल सके।
पश्चिम बंगाल से अतिउर रहमान की रिपोर्ट, न्यूज ANP।

