रूस में निर्मित गेरान ड्रोन को लेकर चिंता अब केवल यूक्रेन युद्ध तक सीमित नहीं रह गयी है। सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि रूस ने गेरान ड्रोन या उसकी उत्पादन तकनीक उत्तर कोरिया तक पहुंचा दी, तो कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य संतुलन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
रूस के तातारस्तान क्षेत्र में स्थित अलाबुगा विशेष आर्थिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गेरान श्रेणी के ड्रोन तैयार किये जाते हैं। हालिया रिपोर्टों में यहां उत्तर कोरियाई कामगारों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है। इसी वजह से आशंका जतायी जा रही है कि उत्तर कोरिया को ड्रोन निर्माण से जुड़ी तकनीकी जानकारी हासिल करने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि रूस उत्तर कोरिया को गेरान ड्रोन या उसकी उत्पादन तकनीक हस्तांतरित करने जा रहा है। यह फिलहाल सुरक्षा विश्लेषण और संभावित खतरे से जुड़ा विषय है।
स्टूडेंट वीजा के जरिये रूस पहुंच रहे उत्तर कोरियाई कामगार
अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान और अन्य देशों से जुड़े बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी समूह यानी Multilateral Sanctions Monitoring Team (MSMT) की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के ड्रोन उद्योग में बड़ी संख्या में उत्तर कोरियाई नागरिक काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि रूस में सैन्य ड्रोन निर्माण से जुड़े कार्यों में 25 हजार तक उत्तर कोरियाई नागरिक शामिल हो सकते हैं। इनमें अलाबुगा विशेष आर्थिक क्षेत्र भी प्रमुख स्थानों में बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कई उत्तर कोरियाई नागरिकों को स्टूडेंट वीजा के जरिये रूस भेजा जा रहा है। इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचने के संभावित तरीके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उत्तर कोरियाई श्रमिकों के विदेश में काम करने पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू हैं।
गेरान-5 ड्रोन की क्षमता ने बढ़ायी चिंता
रूस यूक्रेन युद्ध में गेरान श्रेणी के ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। गेरान-2 अब तक प्रमुख मॉडलों में शामिल रहा है, जबकि हाल के समय में गेरान-5 को लेकर चर्चा बढ़ी है।
रिपोर्टों के अनुसार, गेरान-5 करीब 600 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ सकता है और लगभग 90 किलोग्राम का हथियार ले जाने में सक्षम बताया जाता है। इसकी तेज गति और लंबी दूरी की क्षमता इसे रोकना चुनौतीपूर्ण बना सकती है।
यही कारण है कि यदि इस तरह के ड्रोन या इनकी तकनीक उत्तर कोरिया तक पहुंचती है, तो दक्षिण कोरिया और जापान के लिए सुरक्षा संबंधी नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
सैन्य ठिकानों के साथ औद्योगिक क्षेत्रों पर भी खतरे की आशंका
एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में रूसी सैन्य ब्लॉग रायबर के विश्लेषण का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि लंबी दूरी के ड्रोन उत्तर कोरिया के पड़ोसी देशों में मौजूद सैन्य और रणनीतिक ठिकानों के लिए संभावित खतरा बन सकते हैं।
दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान, एयरबेस और महत्वपूर्ण रक्षा सुविधाएं संभावित संवेदनशील स्थानों में शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा, देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्र भी चिंता का विषय बन सकते हैं।
रायबर के विश्लेषण में दक्षिण कोरिया के सैमसंग उत्पादन केंद्रों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और बंदरगाहों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये किसी आधिकारिक उत्तर कोरियाई हमले की योजना नहीं, बल्कि एक रूसी सैन्य ब्लॉग का संभावित खतरे संबंधी आकलन है।
सैमसंग, टोयोटा और जापान के औद्योगिक ढांचे पर चर्चा
दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, वाहन निर्माण और निर्यात आधारित उद्योगों पर काफी निर्भर है। ऐसे में किसी बड़े सैन्य संकट की स्थिति में केवल रक्षा प्रतिष्ठान ही नहीं, बल्कि कारखाने, बिजली संयंत्र, तेल भंडार और बंदरगाह भी रणनीतिक महत्व रखते हैं।
जापान के संदर्भ में भी ऐसी ही आशंकाएं जतायी गयी हैं। नागोया जैसे बड़े बंदरगाहों के अलावा टोयोटा और मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के औद्योगिक प्रतिष्ठान देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
विश्लेषणों के अनुसार, यदि उत्तर कोरिया को लंबी दूरी के आधुनिक ड्रोन हासिल होते हैं, तो संभावित खतरा सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर औद्योगिक और ऊर्जा ढांचे तक पहुंच सकता है।
रूस की मदद से उत्तर कोरिया की ड्रोन क्षमता बढ़ने की आशंका
उत्तर कोरिया पहले से ही मिसाइल और ड्रोन क्षमता विकसित करने पर काम कर रहा है। रूस के साथ उसके सैन्य और रणनीतिक संबंधों में भी पिछले कुछ समय में नजदीकी देखी गयी है।
अलाबुगा जैसे सैन्य उत्पादन केंद्रों में उत्तर कोरियाई कामगारों की मौजूदगी इस सहयोग के औद्योगिक पहलू को सामने लाती है। यदि इन कामगारों के माध्यम से आधुनिक ड्रोन निर्माण की जानकारी उत्तर कोरिया तक पहुंचती है, तो प्योंगयांग अपनी ड्रोन उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
फिलहाल गेरान ड्रोन या उसकी तकनीक के आधिकारिक हस्तांतरण की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन रूस, उत्तर कोरिया और सैन्य तकनीक के बीच बढ़ते संपर्क ने दक्षिण कोरिया, जापान और उनके सहयोगियों के सामने संभावित सुरक्षा चुनौतियों को लेकर बहस तेज कर दी है।

