धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय को अतिरिक्त प्रभार के तौर पर चलाने के बजाय पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री की नियुक्ति की जानी चाहिए।
राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक बयान के मुताबिक, 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किया गया था। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।
पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री की मांग
सौरव दास ने कहा कि सरकार को शिक्षा मंत्रालय के लिए पूर्णकालिक मंत्री नियुक्त करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को अब युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
दास का कहना है कि प्रह्लाद जोशी के पास पहले से अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी उनके पास होने से कई प्रशासनिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
CJP ने सरकार पर लगाए आरोप
सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि देश के युवा अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं और सरकार को इन मुद्दों पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जल्द फैसले लेने चाहिए।
CJP ने की स्थायी नियुक्ति की मांग
CJP के सह-संयोजक ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय के लिए स्थायी और पूर्णकालिक मंत्री की नियुक्ति से शिक्षा से जुड़े फैसलों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा।
उन्होंने दावा किया कि कैबिनेट में फेरबदल काफी समय से लंबित है और इसका असर शिक्षा मंत्रालय के कामकाज पर भी पड़ रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिली थी जिम्मेदारी
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। राष्ट्रपति भवन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की थी।
CJP ने इससे पहले शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन ने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की थी।
हालांकि, वर्तमान में सरकारी वेबसाइट पर प्रह्लाद जोशी को भारत सरकार का शिक्षा मंत्री बताया गया है। इसलिए CJP की ओर से उठाए गए “पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री” के मुद्दे को संगठन की मांग और राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।

