नई दिल्ली: समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा।
अमित शाह के इस बयान के बाद विपक्षी दलों और कुछ NDA सहयोगी दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां कुछ सहयोगी दलों ने UCC का समर्थन किया है, वहीं JDU और LJP (रामविलास) ने इस मुद्दे पर सावधानी से अपनी राय रखने की बात कही है।
1. TDP और शिवसेना ने किया समर्थन
NDA के सहयोगी दलों में TDP और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने UCC के मुद्दे पर अमित शाह के बयान का समर्थन किया है।
शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि पार्टी के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे सभी के लिए एक समान कानून की बात करते थे। वहीं TDP की ओर से भी UCC को लेकर सकारात्मक रुख सामने आया है।
2. JDU और LJP की अलग राय
बिहार में NDA की सहयोगी JDU ने UCC को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि कानून के प्रावधानों को देखने और उन पर चर्चा करने के बाद ही अंतिम रुख तय किया जाएगा। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक JDU ने कहा है कि वह बिना वजह किसी प्रस्ताव का विरोध नहीं करेगी, लेकिन प्रावधानों की समीक्षा जरूरी होगी।
वहीं चिराग पासवान की LJP (रामविलास) ने कहा है कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए सभी पक्षों से व्यापक चर्चा होनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि UCC का प्रारूप सामने आने के बाद वह अपना रुख स्पष्ट करेगी।
3. कांग्रेस ने बनाई रणनीति
UCC के मुद्दे पर कांग्रेस ने भी अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग की बैठक में इस मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।
कांग्रेस नेताओं ने UCC को लेकर व्यापक चर्चा और सभी वर्गों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है।
4. ओवैसी ने NDA सहयोगियों से मांगा रुख
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी UCC को लेकर NDA के सहयोगी दलों से अपना स्पष्ट रुख बताने की मांग की है। उन्होंने खास तौर पर JDU और TDP जैसी पार्टियों से इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
5. उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि अगर BJP के पास UCC लागू करने के लिए पर्याप्त समर्थन है, तो इसे संसद में लाकर कानून बनाना चाहिए।
उन्होंने राज्य-दर-राज्य UCC लागू करने की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के बड़े मुद्दे पर संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए।
अभी कहां लागू है UCC?
फिलहाल उत्तराखंड में UCC लागू है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में UCC से जुड़े कानून विधानसभा से पारित हो चुके हैं, लेकिन इन कानूनों की आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
UCC के तहत आम तौर पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों के लिए समान नियम बनाने की बात की जाती है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में प्रस्तावित या पारित UCC के प्रावधान एक जैसे नहीं हैं।

