नई दिल्ली: नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को हुए 18वें BRICS समिट में टेक्नोलॉजी सबसे बड़े मुद्दों में से एक रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेतावनी दी कि टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार की तरह इस्तेमाल करना दुनिया की तरक्की के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने BRICS देशों के लिए ओपन-सोर्स AI इकोसिस्टम बनाने का प्रस्ताव रखा. समिट में डिजिटल इकोनॉमी, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप और सप्लाई चेन को लेकर भी कई अहम फैसले हुए.
PM मोदी ने टेक्नोलॉजी को हथियार बनाने पर क्यों जताई चिंता?
समिट के क्लोजिंग सेशन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स का हथियारीकरण साझा विकास में रुकावट बन सकता है.
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी का फायदा सभी देशों तक पहुंचना चाहिए और इसे लेकर मिलकर काम करने की जरूरत है.
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश लिथियम, निकल और कोबाल्ट के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है.
चीन दुनिया में लिथियम की 60%, कोबाल्ट की 68% और रेयर अर्थ की 90% प्रोसेसिंग पर काबिज है. चीन की क्रिटिकल मिनरल्स पर निर्यात पाबंदियों के कारण भारतीय कंपनियों को रेयर-अर्थ मैग्नेट की सप्लाई में भी परेशानी हुई है.
अगर टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए होता रहा तो भारत जैसे विकासशील देशों की टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार प्रभावित हो सकती है. इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS देशों से सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की अपील की.
चीन का बड़ा प्रस्ताव- BRICS के लिए ओपन-सोर्स AI
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने समिट में पांच बड़ी पहलों का ऐलान किया. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा ओपन-सोर्स AI को लेकर हुई.
शी ने कहा कि चीन BRICS AI ओपन-सोर्स कम्युनिटी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा. इसके तहत बड़े लैंग्वेज मॉडल के विकास और इस्तेमाल में सहयोग किया जाएगा. साथ ही AI से जुड़े सेमिनार और ट्रेनिंग कोर्स भी आयोजित किए जाएंगे.
चीन ने AI के लिए एक खुला और सभी देशों को साथ लेकर चलने वाला इकोसिस्टम बनाने की बात कही.
शी ने एक ‘ब्रॉड, कंसेंसस-बेस्ड ग्लोबल AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क’ बनाने की भी वकालत की.
चीन की यह पहल ऐसे समय आई है जब अमेरिका एडवांस्ड AI टेक्नोलॉजी के विकास और इस्तेमाल को लेकर कई तरह के नियंत्रण की कोशिश कर रहा है.
डिजिटल इकोनॉमी और स्मार्ट फैक्ट्री पर भी जोर
शी जिनपिंग की बाकी चार पहलें भी टेक्नोलॉजी और अर्थव्यवस्था से जुड़ी थीं. इनमें ट्रेड और इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन, डिजिटल इंडस्ट्री कोऑपरेशन, इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग और साइंस-टेक्नोलॉजी टैलेंट डेवलपमेंट शामिल हैं.
डिजिटल इंडस्ट्री पहल के तहत चीन BRICS डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म बनाना चाहता है. यहां डिजिटल स्किल ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी एक्सचेंज और इंडस्ट्रियल अलाइनमेंट पर काम किया जाएगा.
इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग के तहत चीन BRICS देशों को स्मार्ट फैक्ट्री विकसित करने में मदद देगा.
वहीं इंजीनियरों के विकास और उनकी योग्यता के मानकों को लेकर सहयोग के लिए BRICS इंजीनियर कल्टिवेशन अलायंस बनाने की बात कही गई है.
AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर भारत का अपना एजेंडा
भारत की अध्यक्षता में तैयार नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 में टेक्नोलॉजी को लेकर कई अहम मुद्दे शामिल किए गए.
इनमें AI, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी DPI, टेलीकॉम और सबमरीन नेटवर्क, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं.
डिक्लेरेशन में कहा गया कि AI आर्थिक विकास और सतत विकास के लिए बड़ा अवसर है. लेकिन डीपफेक, गलत जानकारी, हेट स्पीच और साइबर क्राइम जैसे खतरों से निपटना भी जरूरी है.
BRICS देशों ने AI रिसोर्सेज तक पहुंच बढ़ाने और AI गवर्नेंस के लिए साझा ढांचा तैयार करने पर सहमति जताई.
भारत ने दिखाई अपनी टेक्नोलॉजी ताकत
भारत ने समिट के दौरान अपनी टेक्नोलॉजी क्षमता भी दिखाई. भारत मंडपम में ‘भारत इनोवेट्स एक्सपो’ लगाया गया, जिसमें 37 स्टार्टअप और कंपनियों ने अपनी तकनीक प्रदर्शित की.
इनमें AI आधारित सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्शन टेक्नोलॉजी, मरीन रोबोटिक्स, फ्लोटिंग सोलर पैनल, क्वांटम कंप्यूटिंग सिस्टम और रेयर-अर्थ-फ्री इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम शामिल थे.
स्टार्टअप्स और डिजिटल खेती पर भी बड़ा फैसला
BRICS ने सदस्य देशों के स्टार्टअप्स को जोड़ने के लिए BRICS इनक्यूबेटर नेटवर्क बनाने का फैसला किया.
इसके अलावा BRICS स्टार्टअप इनोवेशन फंड का प्रस्ताव रखा गया. इसका उद्देश्य शुरुआती और ग्रोथ स्टेज के स्टार्टअप्स को फंडिंग देना है. हालांकि इस फंड का कॉर्पस, स्ट्रक्चर और लॉन्च टाइमलाइन अभी तय नहीं हुई है.
खेती के लिए BRICS नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर बनाया गया है. इसमें AI, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की मदद से किसानों के लिए डेटा आधारित समाधान तैयार किए जाएंगे.
इसमें प्रेसिजन फार्मिंग, रिमोट सेंसिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग, ड्रोन और IoT जैसी तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है.
सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर
BRICS देशों ने सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए BRICS लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क बनाने का फैसला किया.
इसका मकसद सदस्य देशों की सप्लाई चेन को ज्यादा भरोसेमंद और मजबूत बनाना है.
क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर नई दिल्ली डिक्लेरेशन में कहा गया कि इनकी सप्लाई चेन भरोसेमंद, जिम्मेदार, विविध, मजबूत, निष्पक्ष, टिकाऊ और न्यायपूर्ण होनी चाहिए.
क्वांटम टेक्नोलॉजी भी एजेंडे में
BRICS देशों ने क्वांटम टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया.
जून 2026 में मॉस्को में पहला BRICS क्वांटम टेक्नोलॉजी फोरम आयोजित हुआ था. इसमें 300 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.
BRICS न्यूक्लियर एनर्जी प्लेटफॉर्म के सदस्यों ने क्वांटम कंप्यूटिंग को लेकर संयुक्त बयान भी जारी किया. इसमें ऊर्जा क्षेत्र में क्वांटम कंप्यूटिंग की बढ़ती भूमिका को माना गया.
सेमीकंडक्टर पर भारत की बातचीत
सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत ने मलेशिया के साथ सहयोग पर चर्चा की.
प्रधानमंत्री मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच डेटा सेंटर, डिजिटल इंडस्ट्रियल ट्रांसफॉर्मेशन और सेमीकंडक्टर से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई.
साउथ अफ्रीका और रूस की पहल
साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने चीन के AI प्रस्ताव का समर्थन किया. उन्होंने AI में सहयोग को BRICS देशों के लिए जरूरी बताया और इसे क्लाइमेट अडैप्टेशन और सस्टेनेबल ग्रोथ से जोड़ा.
वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक नए इंश्योरेंस मैकेनिज्म और ग्रेन मार्केट में सहयोग की पहल रखी.
टेक्नोलॉजी की नई दौड़ में BRICS की भूमिका
18वें BRICS समिट से यह साफ हो गया कि टेक्नोलॉजी अब सिर्फ नई खोज और इनोवेशन का विषय नहीं रह गई है. यह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का भी अहम हिस्सा बन चुकी है.
प्रधानमंत्री मोदी ने टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करने के खिलाफ चेतावनी दी. वहीं चीन ने ओपन-सोर्स AI और डिजिटल इकोसिस्टम का प्रस्ताव रखकर एक अलग मॉडल पेश करने की कोशिश की.
भारत के लिए BRICS का यह एजेंडा AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का मौका दे सकता है. इससे आने वाले समय में भारत की टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिल सकती है.

