नवी मुंबई: हिंदी दिवस के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की अपील की. सोमवार को नवी मुंबई में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के विकास के लिए सभी राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर एक साथ काम करना चाहिए.
अमित शाह ने कहा कि कोई भी बच्चा अपने देश और समाज को सबसे बेहतर तरीके से अपनी मातृभाषा के जरिए समझ सकता है. केंद्र सरकार का लक्ष्य भारतीय भाषाओं को शासन और विज्ञान की भाषा बनाना है.
उन्होंने कहा कि भारत अपनी भाषाई विविधता और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है. देश की सभी भाषाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए.
हिंदी दूसरी भारतीय भाषाओं की विरोधी नहीं
अमित शाह ने कहा कि हिंदी को देश की दूसरी भाषाओं की प्रतिद्वंद्वी नहीं समझना चाहिए. उनके मुताबिक हिंदी राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाली भाषा है.
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों को शुरुआती शिक्षा मातृभाषा में देने पर जोर दिया गया है. साथ ही, बच्चों को अपनी मातृभाषा के अलावा एक और भारतीय भाषा सीखने का भी प्रावधान है.
शाह ने कहा कि जो लोग भारतीय भाषाओं को सीखने के इस प्रावधान का विरोध कर रहे हैं, उन्हें इसके महत्व को समझना चाहिए.
महाराष्ट्र में सभी भाषाओं का सम्मान
महाराष्ट्र का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यह देश का एक प्रमुख बहुभाषी राज्य है, जहां अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों को सम्मान मिलता है.
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने मराठी को ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा दिया है. सरकार का प्रयास है कि देश की सभी भारतीय भाषाओं का संरक्षण और विकास हो.
वंदे मातरम् को लेकर भी बोले शाह
अमित शाह ने अपने संबोधन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि इसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना जगाने का काम किया.
शाह ने कहा कि वंदे मातरम् को उसका पूरा सम्मान दिलाने में कई दशक लग गए. उन्होंने सरकारी कार्यक्रमों में इसके शुरुआती दो छंद गाने की पुरानी व्यवस्था का भी जिक्र किया.
गृह मंत्री ने कहा कि अब वंदे मातरम् को फिर से पूरा सम्मान मिला है और सरकारी कार्यक्रमों में इसे पूरा गाया जा रहा है. उन्होंने इसे देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत बताया.

