नई दिल्ली: देश में E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों की चिंता बढ़ती जा रही है। सरकार की ओर से E20 को स्टैंडर्ड फ्यूल के तौर पर बढ़ावा दिए जाने के बाद कई लोग शिकायत कर रहे हैं कि इससे गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और पुरानी गाड़ियों के इंजन या दूसरे हिस्सों पर असर पड़ सकता है।
सरकार अब E22, E25, E27 और E30 जैसे ज्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल पर भी विचार कर रही है। इन फ्यूल ग्रेड्स को बढ़ावा देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में छूट की घोषणा भी की गई है।
3 से 5 फीसदी तक कम हो सकता है माइलेज
तेलंगाना के परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने बुधवार को विधान परिषद में E20 से जुड़े सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके विभाग को वाहन मालिकों या ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों की ओर से E20 के कारण गाड़ियों को नुकसान होने की कोई बड़ी शिकायत नहीं मिली है।
हालांकि, उन्होंने माना कि पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल में ऊर्जा कम होती है। इसलिए गाड़ी के पिकअप और माइलेज में करीब 3 से 5 फीसदी तक कमी आ सकती है।
मंत्री के मुताबिक, गाड़ियों की नियमित सर्विसिंग कराई जाए तो उन्हें बड़ी परेशानी के बिना चलाया जा सकता है।
नई गाड़ियां E20 के हिसाब से तैयार
पोन्नम प्रभाकर ने बताया कि अप्रैल 2023 के बाद बनी गाड़ियों को E20 फ्यूल के इस्तेमाल के हिसाब से डिजाइन किया गया है। वहीं, पुरानी गाड़ियों में E20 के इस्तेमाल के लिए कुछ बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि E20 केंद्र सरकार की नीति के तहत लागू किया जा रहा है और तेल कंपनियां इसके इस्तेमाल पर नजर रख रही हैं।
सरकार क्यों बढ़ा रही है इथेनॉल का इस्तेमाल?
इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने के पीछे सरकार के कई उद्देश्य हैं। इनमें:
- कच्चे तेल के आयात को कम करना
- विदेशी मुद्रा की बचत करना
- किसानों की आय बढ़ाना
- कार्बन उत्सर्जन कम करना
सरकार के मुताबिक, पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग 2014 में करीब 1.53 फीसदी थी, जिसे बढ़ाकर 2025 में 20 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। सरकार का दावा है कि पिछले 11 वर्षों में इससे ₹1.44 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंता
दूसरी तरफ, सोशल मीडिया और वर्कशॉप्स में कई वाहन मालिक माइलेज कम होने और गाड़ियों के रखरखाव को लेकर चिंता जता रहे हैं।
Federation of Automobile Dealers Associations (FADA) ने भी माना है कि शुरुआत में डीलर्स के पास ग्राहकों के सवालों का जवाब देने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं थी। हालांकि, अब वाहन बनाने वाली कंपनियों ने डीलर्स को ग्राहकों की समस्याओं से निपटने के लिए SOP (Standard Operating Procedure) उपलब्ध कराए हैं।
E20 के बाद क्या होगा?
अब बहस सिर्फ E20 तक सीमित नहीं है। सरकार E20 से आगे E22, E25, E27 और E30 जैसे ज्यादा ब्लेंड वाले पेट्रोल पर भी विचार कर रही है।
ऑटोमोबाइल कंपनियों का कहना है कि E20 से आगे बढ़ने के लिए इंजन, फ्यूल सिस्टम और दूसरे मटीरियल की नए सिरे से टेस्टिंग और मंजूरी जरूरी होगी। कुछ कंपनियों ने यह भी कहा है कि उनकी मौजूदा गाड़ियों की ज्यादा इथेनॉल वाले फ्यूल के साथ पर्याप्त टेस्टिंग नहीं हुई है।
पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल को एक विकल्प के तौर पर फिर से उपलब्ध कराने पर भी शुरुआती चर्चा हुई है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि देश में एक साथ दो तरह के पेट्रोल ग्रेड रखने से लॉजिस्टिक्स और लागत बढ़ सकती है।
इस बीच, तेलंगाना के परिवहन मंत्री ने उद्योगों से प्रदूषण नियंत्रण के जरूरी उपायों के साथ इथेनॉल प्लांट लगाने पर विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र की राष्ट्रीय इथेनॉल नीति को लागू करने में सहयोग करती रहेगी।

