नई दिल्ली: नोएडा के मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में छात्रा आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है।
हाई कोर्ट ने आकृति की हिरासत को मनमाना बताते हुए उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने यह रकम गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम और मामले में जिम्मेदार दूसरे अधिकारियों के वेतन से वसूलने को कहा था।
बुधवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच को बताया कि हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों ने वेतन बढ़ाने और अपने अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इसी दौरान 25 साल की छात्रा आकृति चौधरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
बाद में जिला प्रशासन ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की थी।
आकृति ने इस कार्रवाई के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आकृति पर लोगों को हिंसा के लिए उकसाने के ठोस सबूत नहीं मिले।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना और अपनी बात रखना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।
कोर्ट के मुताबिक, प्रशासन ने NSA लगाने के लिए WhatsApp चैट, वीडियो या अन्य ठोस सबूत पेश नहीं किए। इसलिए अदालत ने आकृति की हिरासत को रद्द कर दिया।
इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। यह रकम संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूलने की बात कही गई।
यूपी सरकार ने क्यों दी चुनौती?
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सरकार के मुताबिक, जिला अधिकारी ने पुलिस की रिपोर्ट और मौके की स्थिति को देखते हुए NSA लगाने का फैसला किया था।
सरकार हाई कोर्ट के हिरासत रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है। साथ ही उसका कहना है कि अधिकारियों के वेतन से 5 लाख रुपये की वसूली का आदेश उचित नहीं है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि आकृति की NSA हिरासत और अधिकारियों से मुआवजा वसूलने के हाई कोर्ट के आदेश पर क्या रुख अपनाया जाता है।

