ISRO के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों में चिंता, 9 संगठनों ने चेयरमैन से मांगा जवाब

ISRO के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों में चिंता, 9 संगठनों ने चेयरमैन से मांगा जवाब

स्पेस सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों की बढ़ती भूमिका को लेकर ISRO के कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है। ISRO के हजारों कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 9 कर्मचारी संगठनों ने स्पेस एजेंसी के कामकाज को निजी कंपनियों को सौंपने की दिशा को लेकर आधिकारिक जानकारी मांगी है।

कर्मचारी संगठनों ने ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन को पत्र लिखकर पूछा है कि निजीकरण की योजना क्या है और इसका मौजूदा कर्मचारियों के साथ-साथ ISRO की भविष्य की भूमिका पर क्या असर पड़ेगा।

9 कर्मचारी संगठनों ने लिखा पत्र

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पत्र ISRO के GSLV रॉकेट से अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग के कुछ घंटों बाद भेजा गया था।

पत्र पर ISRO के कई केंद्रों से जुड़े कर्मचारी संगठनों के हस्ताक्षर हैं। इनमें ISRO स्टाफ एसोसिएशन, SHAR एम्प्लॉईज एसोसिएशन, ISAC एम्प्लॉईज एसोसिएशन, ISRO स्टाफ एसोसिएशन-LPSC, ISRO स्टाफ एसोसिएशन-BBU, NRSA एम्प्लॉईज यूनियन, स्पेस एम्प्लॉईज एसोसिएशन-BBU, ISRO स्टाफ एसोसिएशन-IPRC और SAC एम्प्लॉईज वेलफेयर एसोसिएशन शामिल हैं।

पवन कुमार गोयनका के बयान से बढ़ी चिंता

कर्मचारियों की चिंता उस समय और बढ़ गई जब IN-SPACe के चेयरमैन पवन कुमार गोयनका ने एक कार्यक्रम में कहा कि भविष्य में ISRO लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करेगा। उन्होंने कहा था कि यह काम प्राइवेट कंपनियां या सरकारी कंपनियां यानी PSU कर सकती हैं।

गोयनका के मुताबिक, यह बदलाव SSLV के साथ शुरू हो चुका है और आगे इसे PSLV और LVM3 तक भी बढ़ाया जा सकता है।

ISRO के काम प्राइवेट सेक्टर को देने पर सवाल

कर्मचारी संगठनों ने लॉन्च व्हीकल के प्रोडक्शन को दूसरी जगह शिफ्ट करने और नियमित सैटेलाइट निर्माण का काम ISRO से हटाने जैसी चर्चाओं पर भी सवाल उठाए हैं।

पत्र में यह भी बताया गया है कि ISRO की करीब 120 तकनीकों को पहले ही प्राइवेट सेक्टर को ट्रांसफर किया जा चुका है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इन बदलावों को लेकर कर्मचारियों को सरकार की नीति और उसके आधार के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

ये सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग का काम नहीं

पत्र में कर्मचारी संगठनों ने कहा कि रॉकेट का डिजाइन, निर्माण, इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और लॉन्च ऑपरेशन सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग का काम नहीं है।

उनके मुताबिक, ये सभी काम ISRO की मुख्य तकनीकी क्षमता, वर्षों से जुटाई गई संस्थागत जानकारी और देश की रणनीतिक क्षमता का हिस्सा हैं।

कर्मचारी संगठनों ने इसलिए ISRO और अंतरिक्ष विभाग से इस पूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट नीति और आधिकारिक जानकारी देने की मांग की है।

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