पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने पंजाब की सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब को भारत से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा की तुलना में पड़ोसी पाकिस्तानी प्रांतों से होने वाली घुसपैठ से ज्यादा खतरा है।
मरियम नवाज ने खास तौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पंजाब की सीमाएं सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से लगती हैं। इन इलाकों से लोगों की आवाजाही के कारण पंजाब में सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियां बनी रहती हैं।
उनके मुताबिक, पंजाब को सीमा पार अपराध, अवैध तस्करी और अलग-अलग प्रांतों की सीमाओं के बीच चरमपंथी तत्वों की आवाजाही जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
भारत से ज्यादा आंतरिक सुरक्षा की चिंता
मरियम नवाज का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि उन्होंने भारत से लगी सीमा के बजाय पाकिस्तान के अंदर से आने वाली सुरक्षा चुनौतियों को ज्यादा बड़ी चिंता बताया है।
बलूचिस्तान के साथ सिंध और खैबर पख्तूनख्वा का नाम लिए जाने को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पाकिस्तान के अलग-अलग प्रांतों के बीच बढ़ती दूरी और आपसी अविश्वास को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बलूच नागरिकों को जबरन गायब करने का आरोप
इसी बीच मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पांक (Paank) ने पाकिस्तान में बलूच नागरिकों के खिलाफ हिंसा और उन्हें जबरन गायब किए जाने के आरोप लगाए हैं।
पांक के मुताबिक, 3 सितंबर को लाहौर से अम्मार बलूच नाम के एक युवक को कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उठा लिया। संस्था का कहना है कि अम्मार ने विदेश में उच्च शिक्षा हासिल की थी और अपना भविष्य बनाने के लिए पाकिस्तान लौटा था। इसके बाद से उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
पांक ने कहा कि अम्मार का गायब होना पढ़े-लिखे बलूच युवाओं के बीच मौजूद असुरक्षा को दिखाता है।
मजदूर अदनान बलोच के गायब होने का दावा
एक अन्य घटना में पांक ने दावा किया कि बलूचिस्तान के गेबुन इलाके में रहने वाले मजदूर अदनान बलोच को 2 सितंबर की देर रात पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया।
संस्था के मुताबिक, अभी तक अदनान के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। पांक ने कहा कि ऐसी घटनाओं का असर लोगों की शिक्षा, नौकरी या आर्थिक स्थिति से अलग, हर वर्ग पर पड़ रहा है।
संस्था का कहना है कि परिवार के किसी सदस्य के गायब होने से परिवार को मानसिक परेशानी के साथ आर्थिक मुश्किलों का भी सामना करना पड़ता है।
जुड़वां भाइयों को भी हिरासत में लेने का आरोप
पांक ने 2 सितंबर को गेबुन में जुड़वां भाइयों मुहम्मद और अहमद को कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने का भी आरोप लगाया।
संस्था के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बल उनके घर में घुसे और दोनों भाइयों को हिरासत में लेकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। इसके बाद से उनके ठिकाने और स्वास्थ्य के बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं दी गई है।
पांक का दावा है कि दोनों भाई दिहाड़ी मजदूर हैं और अपने परिवार का खर्च चलाते हैं। संस्था के मुताबिक, उनका कोई राजनीतिक संबंध या आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उन्हें बिना वारंट या आरोप बताए हिरासत में लिया गया।
मानवाधिकार संगठनों से कार्रवाई की अपील
पांक ने कहा कि किसी व्यक्ति को गुप्त तरीके से हिरासत में रखना और उसके ठिकाने की जानकारी नहीं देना गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है। इससे हिरासत में लिए गए लोगों के साथ दुर्व्यवहार का खतरा बढ़ जाता है और परिवार लंबे समय तक अपने लोगों की स्थिति को लेकर परेशान रहते हैं।
संस्था ने संयुक्त राष्ट्र के संबंधित संगठनों, मानवाधिकार संस्थाओं और राजनयिक समुदाय से पाकिस्तान पर दबाव बनाने की अपील की है। पांक की मांग है कि जबरन गायब किए गए लोगों के बारे में जानकारी दी जाए और इस तरह की घटनाओं को रोका जाए।
पाकिस्तान में पंजाब के प्रभाव पर भी सवाल
इस पूरे मामले के बीच पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के प्रभाव को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का दावा है कि पाकिस्तान की सेना और सत्ता के ढांचे में पंजाब का प्रभाव काफी मजबूत है।
साथ ही यह दावा भी किया जाता है कि पाकिस्तान के आर्थिक संसाधनों का बड़ा हिस्सा पंजाब में इस्तेमाल होता है। ऐसे में मरियम नवाज का दूसरे पाकिस्तानी प्रांतों से ज्यादा खतरे वाला बयान देश के भीतर चल रही क्षेत्रीय खींचतान को लेकर नई बहस खड़ी कर रहा है।

