छत पर ऐसे उगाएं लंबी और हरी-भरी लौकी, पुराने प्लास्टिक बोरे से बनाएं फ्री ग्रो बैग

छत पर ऐसे उगाएं लंबी और हरी-भरी लौकी, पुराने प्लास्टिक बोरे से बनाएं फ्री ग्रो बैग

घर की छत पर सब्जियां उगाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन महंगे गमले, ग्रो बैग और खाद खरीदने के खर्च की वजह से कई लोग पीछे हट जाते हैं। अगर आप भी कम खर्च में घर की छत पर लौकी उगाना चाहते हैं, तो पुरानी प्लास्टिक बोरी और बेकार पड़े PVC पाइप का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस तरीके में पुरानी बोरी को ग्रो बैग की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जबकि PVC पाइप या बांस से लौकी की बेल के लिए मचान तैयार किया जाता है।

पुरानी प्लास्टिक बोरी बनेगी ग्रो बैग

इसके लिए घर में रखी पुरानी अनाज या सीमेंट की प्लास्टिक बोरी ले सकते हैं। बोरी में अच्छी मिट्टी और गोबर की खाद भरें।

अब बोरी को छत की समतल जगह पर लिटा दें। इसके ऊपरी हिस्से में कटर की मदद से एक गोल छेद बनाएं। इस छेद में थोड़ी मिट्टी हटाकर लौकी का तैयार पौधा लगा दें। पौधा लगाने के बाद हल्का पानी जरूर दें।

PVC पाइप से बनाएं लौकी का मचान

लौकी बेल वाली सब्जी है, इसलिए इसके पौधे को ऊपर चढ़ने के लिए मजबूत सहारे की जरूरत होती है।

इसके लिए बोरी के चारों तरफ PVC पाइप या बांस की डंडियां लगाएं। ऊपर से पाइपों को आपस में जोड़कर चौकोर मचान या मांडवा तैयार कर लें।

जब बेल बढ़ने लगे तो उसे धीरे-धीरे मचान पर चढ़ाएं। जरूरत पड़ने पर धागे या पतली केबल टाई से बेल को हल्के से बांध सकते हैं।

पानी देते समय रखें ध्यान

लौकी के पौधे को नियमित रूप से पानी दें, लेकिन बोरी में पानी जमा नहीं होना चाहिए। इसके लिए बोरी के नीचे कुछ छोटे छेद कर दें, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।

पौधे की जरूरत के हिसाब से जैविक खाद भी दी जा सकती है। घर में उपलब्ध जैविक सामग्री का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखें कि वह सड़ी-गली या फफूंद लगी न हो।

मचान पर लटकने से लौकी को मिलेगी जगह

जब लौकी की बेल मचान पर फैल जाएगी, तो फल नीचे की ओर लटककर बढ़ सकते हैं। इससे उन्हें जमीन से दूर रखने में मदद मिलती है और जमीन के संपर्क से होने वाली सड़न का खतरा कम हो सकता है।

हालांकि, लौकी कितनी लंबी और कितनी ज्यादा होगी, यह मौसम, बीज की किस्म, मिट्टी, पानी और देखभाल पर निर्भर करता है। इसलिए इसे पक्की या तय पैदावार की गारंटी नहीं माना जा सकता।

डिस्क्लेमर

इस लेख में बताए गए तरीके सोशल मीडिया वीडियो और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। इनके परिणाम अलग-अलग परिस्थितियों में अलग हो सकते हैं।

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