धनबाद, 3 सितंबर। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के फ्यूल्स, मिनरल्स एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आरती कुमारी ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन वेबिनार में इनवाइटेड स्पीकर के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने “लिथियम रिफाइनिंग एंड इंडस्ट्रियल बेस्ट प्रैक्टिसेज” विषय पर अपना व्याख्यान दिया।
यह आमंत्रण क्रिटिकल मिनरल्स, हाइड्रोमेटलर्जी और नॉन-फेरस मेटल प्रोसेसिंग के क्षेत्र में डॉ. आरती कुमारी की शोध विशेषज्ञता की पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
लिथियम के संसाधनों और प्रोसेसिंग तकनीकों पर हुई चर्चा
आईओसीएल द्वारा आयोजित इस वेबिनार का विषय “लिथियम: रिसोर्सेज, प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजीज एंड फ्यूचर पर्सपेक्टिव्स” था।
वेबिनार के दौरान लिथियम संसाधनों, उनकी प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों और भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में लिथियम की बढ़ती भूमिका
कार्यक्रम में लिथियम को एक महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल के रूप में रेखांकित किया गया। तेजी से विकसित हो रहे ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में लिथियम की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
वेबिनार के माध्यम से लिथियम प्रोसेसिंग से जुड़ी तकनीकों और भविष्य में इसके औद्योगिक उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। डॉ. आरती कुमारी ने लिथियम रिफाइनिंग और इंडस्ट्रियल बेस्ट प्रैक्टिसेज से संबंधित अपने अनुभव और शोध विशेषज्ञता को साझा किया।
हाइड्रोमेटलर्जी और मेटल प्रोसेसिंग में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव
डॉ. आरती कुमारी को हाइड्रोमेटलर्जी, रेयर अर्थ्स एक्सट्रैक्शन और नॉन-फेरस मेटल प्रोसेसिंग के क्षेत्र में 12 वर्षों से अधिक का शोध अनुभव है।
उनके शोध कार्यों में नॉन-फेरस मेटल एक्सट्रैक्शन, हाइड्रोमेटलर्जी, वेस्ट प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा वह रेयर अर्थ्स एक्सट्रैक्शन, एनडीएफईबी मैग्नेट प्रोसेसिंग तथा मेटल सेपरेशन एंड प्यूरिफिकेशन से जुड़े विषयों पर भी शोध कर रही हैं।
आईआईटी (आईएसएम) और इंडस्ट्री के बीच ज्ञान साझेदारी को मजबूती
आईओसीएल के वेबिनार में डॉ. आरती कुमारी को इनवाइटेड स्पीकर के रूप में आमंत्रित किया जाना आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की शोध विशेषज्ञता और उद्योग जगत के साथ संस्थान के ज्ञान साझेदारी संबंधों को दर्शाता है।
यह उपलब्धि क्रिटिकल मिनरल्स, रिसोर्स रिकवरी और सस्टेनेबल मेटल प्रोसेसिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में संस्थान के योगदान को भी मजबूत करती है।
उभरते शोध क्षेत्रों में संस्थान की बढ़ती भागीदारी
लिथियम सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग और संसाधन रिकवरी वर्तमान समय में शोध और औद्योगिक विकास के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं।
ऐसे विषयों पर उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच विशेषज्ञता साझा करने से नई तकनीकों और बेहतर औद्योगिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलने की संभावना रहती है। आईओसीएल के इस वेबिनार में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की प्रोफेसर की भागीदारी इसी दिशा में संस्थान की सक्रिय शोध भूमिका को दर्शाती है।

