नई दिल्ली। अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर का दर्जा तय करने के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। केंद्र सरकार ने क्रीमी लेयर निर्धारित करने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। कोर्ट ने मंगलवार, 1 सितंबर को इस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है।
यह मामला इस बात से जुड़ा है कि OBC उम्मीदवारों को क्रीमी लेयर में शामिल करने या उससे बाहर रखने के लिए किन मानदंडों को आधार बनाया जाए।
केंद्र ने किस फैसले को दी चुनौती?
केंद्र सरकार की याचिका उस फैसले से जुड़ी है, जिसमें कहा गया था कि OBC उम्मीदवार के क्रीमी लेयर स्टेटस का निर्धारण केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता।
फैसले के अनुसार, किसी उम्मीदवार को OBC आरक्षण के लाभ से बाहर रखा जाए या नहीं, यह तय करते समय आय और संपत्ति के साथ माता-पिता की नौकरी के स्टेटस तथा उनकी कैटेगरी पर भी विचार किया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले को चुनौती दी है। अब अदालत में क्रीमी लेयर निर्धारित करने के मानदंडों से जुड़े इस मुद्दे पर सुनवाई होगी।
आय के साथ नौकरी का स्टेटस भी बनेगा आधार?
मामले में मुख्य सवाल यह है कि OBC क्रीमी लेयर का दर्जा निर्धारित करने के लिए माता-पिता की आय को ही आधार माना जाए या उनकी नौकरी और पद से जुड़े पहलुओं को भी इसमें शामिल किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। इससे OBC आरक्षण के तहत क्रीमी लेयर और नॉन-क्रीमी लेयर के वर्गीकरण से जुड़े नियमों पर असर पड़ सकता है।
क्या है OBC क्रीमी लेयर?
OBC क्रीमी लेयर के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग के अपेक्षाकृत संपन्न वर्गों की पहचान की जाती है। इस वर्ग को सरकारी नौकरी और शिक्षा में OBC आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।
OBC आरक्षण के तहत broadly दो श्रेणियां मानी जाती हैं—नॉन-क्रीमी लेयर और क्रीमी लेयर। नॉन-क्रीमी लेयर वर्ग के पात्र उम्मीदवार सरकारी नौकरी और शिक्षा में OBC आरक्षण का लाभ ले सकते हैं, जबकि क्रीमी लेयर के उम्मीदवार इसके दायरे से बाहर होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
केंद्र सरकार की याचिका के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में यह महत्वपूर्ण मुद्दा सामने है कि OBC क्रीमी लेयर तय करने के लिए कौन-कौन से मानदंड लागू किए जाएं।
अदालत की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि माता-पिता की आय के अलावा उनकी नौकरी के स्टेटस और कैटेगरी को क्रीमी लेयर निर्धारण में किस तरह देखा जाएगा।

