कुल्टी के मद्रासी पाड़ा शीतला मंदिर में 76 वर्षों की परंपरा, भक्तों ने किया अनोखा अनुष्ठान

कुल्टी के मद्रासी पाड़ा शीतला मंदिर में 76 वर्षों की परंपरा, भक्तों ने किया अनोखा अनुष्ठान

कुल्टी। बराकर शहर के नदी तट स्थित वार्ड नंबर 68 के मद्रासी पाड़ा में शीतला माता मंदिर का वार्षिक धार्मिक अनुष्ठान धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। पौराणिक परंपरा के अनुसार आयोजित इस तीन दिवसीय अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

आयोजकों के अनुसार, मद्रासी पाड़ा कमेटी की ओर से वर्ष 1950 से शीतला माता की वार्षिक पूजा आयोजित की जा रही है। इस वर्ष भी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार से शुरू हुआ धार्मिक अनुष्ठान रविवार देर शाम संपन्न हुआ।

बराकर नदी से लाई गई माता की सवारी

पूजा के दौरान देवी का आवाहन और आराधना की गई। धार्मिक परंपरा के तहत बराकर नदी से माता की सवारी लाई गई। इसके बाद पुजारी धनपति स्वामी और पप्पू तिवारी की देखरेख में भक्तिमय वातावरण में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।

इस दौरान बलि परिक्रमा के साथ नगर शोभायात्रा भी निकाली गई। शोभायात्रा और धार्मिक अनुष्ठान के दौरान आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

अंगारों पर चलकर भक्तों ने दिखाई आस्था

माता की आराधना में शामिल कुछ भक्तों ने धार्मिक परंपरा के तहत अंगारों पर चलकर अपनी आस्था प्रकट की। वहीं, कुछ भक्तों ने लंबा त्रिशूल अपने दोनों गालों के आर-पार कर धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। इस दृश्य को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम में कन्हैया भट्ट, अमर प्रसाद, अजय तुरी, जमुना देवी और जगदेव कोनार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

जागरण और खिचड़ी भोग प्रसाद का आयोजन

आयोजकों ने बताया कि शाम को माता के जागरण का आयोजन किया गया। साथ ही उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी का भोग प्रसाद वितरित किया गया।

परंपरा के अनुसार शीतला माता की पूजा के तीन दिन बाद उनके भाई मुनेश्वर भगवान का अलग से पूजा-पाठ किया जाता है।

आयोजन में स्थानीय लोगों की रही सराहनीय भूमिका

वार्षिक धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में मद्रासी पाड़ा कमेटी और स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में अध्यक्ष पाटली कोनार, सचिव शुभम नायकर, दीपक चौधरी, बड़कू साव, गोविंद साव, शंकर कोनार और उदय बाउरी सहित अन्य स्थानीय लोगों ने सहयोग किया।

तीन दिवसीय इस धार्मिक आयोजन के दौरान मद्रासी पाड़ा और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।

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