नुवाकोट। नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और सैलाब की चपेट में नुवाकोट जिले का 76 साल पुराना त्रिभुवन त्रिशूलि सेकेंडरी स्कूल भी आ गया। कभी बच्चों की पढ़ाई और गतिविधियों से गुलजार रहने वाला स्कूल अब मलबे में तब्दील हो चुका है।
हालांकि, इस भीषण आपदा के बीच प्रधानाचार्य राजेंद्र दवादी की सूझबूझ और समय पर लिए गए फैसले से स्कूल में मौजूद करीब 900 बच्चों और स्टाफ की जान बच गई। खतरे के संकेत मिलने के बाद महज कुछ ही मिनट में छात्रों और शिक्षकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया।
तीन मिनट के भीतर समझ आया खतरे का अंदाजा
जब बाढ़ का पानी तेजी से स्कूल परिसर में प्रवेश करने लगा, उस समय वहां करीब एक हजार लोग मौजूद थे। प्रधानाचार्य राजेंद्र दवादी को अलग-अलग माध्यमों से खतरे की जानकारी मिली।
एक अकाउंटेंट ने उन्हें बताया कि पानी तेजी से अंदर घुस रहा है। इसी दौरान एक शिक्षक को फोन पर जानकारी मिली कि आसपास का क्षेत्र जलमग्न हो चुका है। वहीं एक अभिभावक अपनी बेटी को लेने स्कूटर से स्कूल पहुंच गए।
इन संकेतों को देखते हुए प्रधानाचार्य ने बिना समय गंवाए स्कूल की घंटी बजवाई और सभी बच्चों को तत्काल परिसर से बाहर निकालने का निर्देश दिया।
पहाड़ी पर पहुंचाए गए बच्चे और शिक्षक
प्रधानाचार्य के निर्देश के बाद छात्रों और शिक्षकों को सुरक्षित स्थान की ओर ले जाया गया। सभी समय रहते पहाड़ी पर पहुंच गए। इस तरह बड़ी संख्या में बच्चों और स्टाफ की जान बच गई।
हालांकि, इस आपदा के बाद दो स्टाफ सदस्यों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कर्मचारी चुल्लिम लामा और शिक्षक संतोष परिहार शामिल हैं।
स्कूल में कुल 1,643 छात्र पढ़ते थे और यह रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट जिलों के पुराने स्कूलों में शामिल था।
भारत के सहयोग से बनी इमारत भी तबाह
इस प्राकृतिक आपदा में स्कूल की कई संरचनाएं पूरी तरह नष्ट हो गईं। इनमें भारत सरकार के सहयोग से 2015 के भूकंप के बाद निर्मित तीन मंजिला इमारत भी शामिल है।
बताया गया कि भारतीय दूतावास की मदद से तैयार की गई इस इमारत में कुल 18 कमरे थे। बाढ़ और सैलाब ने स्कूल की इस इमारत को भी अपनी चपेट में ले लिया।
आपदा के बाद स्कूल के पास अब केवल दो बसें बची हैं। इनमें से एक बस भारत सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई थी।
प्रधानाचार्य की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
प्राकृतिक आपदा की भयावहता के बीच स्कूल प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। अलग-अलग जगहों से मिले संकेतों को गंभीरता से लेते हुए प्रधानाचार्य ने तुरंत बच्चों को बाहर निकालने का फैसला किया।
यदि समय रहते छात्रों और शिक्षकों को सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया जाता, तो स्थिति और भयावह हो सकती थी। फिलहाल स्कूल पूरी तरह तबाह हो चुका है और दो कर्मचारियों के लापता होने की सूचना ने चिंता बढ़ा दी है।

