मोहन भागवत के बयान पर ओवैसी का पलटवार, बोले- ‘यह RSS की पुरानी चाल है’

मोहन भागवत के बयान पर ओवैसी का पलटवार, बोले- ‘यह RSS की पुरानी चाल है’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए गए एक बयान पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार किया है. ओवैसी ने भागवत के बयान को ‘RSS की पुरानी चाल’ बताया.

मोहन भागवत ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा.

भागवत के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा कि RSS की ओर से दुनिया के सामने कही जाने वाली बात और संगठन के भीतर कही जाने वाली बातों में अंतर रहा है.

ओवैसी ने RSS के पुराने लेखकों का किया जिक्र

ओवैसी ने कहा कि RSS ने अपने प्रमुख विचारकों और लेखकों के पुराने विचारों से कभी पूरी तरह दूरी नहीं बनाई. उन्होंने RSS के संस्थापक के.बी. हेडगेवार और विचारक एम.एस. गोलवलकर की किताबों का हवाला देते हुए संगठन की विचारधारा पर सवाल उठाए.

ओवैसी ने हेडगेवार की जीवनी का जिक्र करते हुए दावा किया कि हेडगेवार महात्मा गांधी के नेतृत्व में हिंदू-मुस्लिम एकता के साथ चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन से सहमत नहीं थे.

उन्होंने इस दावे के समर्थन में ‘Dr. Hedgewar, The Epoch Maker: A Biography’ किताब का भी संदर्भ दिया.

गोलवलकर की किताब का भी दिया हवाला

ओवैसी ने RSS विचारक एम.एस. गोलवलकर की किताब ‘Bunch of Thoughts’ का जिक्र करते हुए संगठन के अल्पसंख्यकों को लेकर पुराने विचारों पर सवाल उठाए.

उन्होंने आरोप लगाया कि गोलवलकर की किताब में मुसलमानों और ईसाइयों को देश के लिए ‘आंतरिक खतरे’ के तौर पर बताया गया था.

ओवैसी ने कहा कि इन पुराने विचारों को नजरअंदाज करके सिर्फ आज दिए गए बयानों के आधार पर RSS की विचारधारा को नहीं समझा जा सकता.

गुजरात दंगों का भी किया जिक्र

ओवैसी ने अपने बयान में 2002 के गुजरात दंगों का भी जिक्र किया. उन्होंने उस दौरान मुसलमानों के खिलाफ हुई हिंसा और महिलाओं के साथ हुए अपराधों को लेकर सवाल उठाए.

उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय हिंसा के दौरान पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे थे. हालांकि, ओवैसी की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर इस बयान में अलग से कोई स्वतंत्र प्रमाण पेश नहीं किया गया.

मुसलमानों और ईसाइयों को लेकर भी लगाए आरोप

ओवैसी ने आरोप लगाया कि RSS की पुरानी विचारधारा में मुसलमानों और ईसाइयों को लेकर नकारात्मक सोच रही है.

उन्होंने कहा कि संगठन के पुराने साहित्य में अल्पसंख्यकों को लेकर कही गई बातों पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए. ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा समय में UCC और धर्मांतरण विरोधी कानूनों जैसे मुद्दों का असर मुसलमानों और ईसाइयों पर पड़ रहा है.

भागवत से की किताबों के अंश पढ़ने की अपील

ओवैसी ने मोहन भागवत से अपील की कि वह सावरकर, हेडगेवार और गोलवलकर की किताबों के कुछ हिस्से सार्वजनिक रूप से पढ़ें.

उन्होंने कहा कि इसके बाद लोगों को खुद तय करने दिया जाए कि वे RSS की विचारधारा और संगठन के बारे में क्या सोचते हैं.

इस तरह मोहन भागवत के न्यूयॉर्क वाले बयान के बाद RSS और AIMIM के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.

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