केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्याज की कीमत बढ़ने का एक बड़ा कारण बिचौलियों की भूमिका भी हो सकती है। सरकार ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है, जिसमें किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिले और आम लोगों को भी महंगे प्याज का बोझ न उठाना पड़े।
दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमत करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने बाजार में अपने बफर स्टॉक से प्याज उतारना शुरू किया है।
कुछ महीने पहले किसानों को नहीं मिल रहा था सही दाम
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कुछ महीने पहले स्थिति बिल्कुल अलग थी। महाराष्ट्र में प्याज की कीमत गिरकर 7-8 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। उस समय किसानों को उनकी फसल की लागत तक नहीं मिल पा रही थी।
किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार को उस समय उनसे प्याज खरीदना पड़ा था। अब ज्यादातर किसान अपना प्याज बेच चुके हैं, लेकिन बाजार में इसकी कीमत काफी बढ़ गई है।
किसानों को कम, बिचौलियों को ज्यादा फायदा?
कृषि मंत्री ने सवाल उठाया कि जब किसान अपनी फसल बेचता है, तो क्या उसे उसकी मेहनत का पूरा पैसा मिलता है? उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या बिचौलियों को इतना ज्यादा मुनाफा कमाने का अधिकार होना चाहिए।
चौहान ने कहा कि सरकार इस मामले पर कार्रवाई कर रही है और इसके लिए एक विशेष टीम भी बनाई गई है। उन्होंने उद्योग जगत से भी ऐसी व्यवस्था बनाने में सहयोग करने को कहा, जिससे किसान और उपभोक्ता दोनों को फायदा हो।
खाद्य सुरक्षा को बताया जरूरी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत के लिए खाद्य सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक हालात को देखते हुए भारत खाद्य सुरक्षा के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना और किसानों की आय बढ़ाना जरूरी है।
आधुनिक खेती पर जोर
कृषि मंत्री ने किसानों से मिट्टी की सेहत सुधारने, पानी बचाने और संतुलित तरीके से खाद-रसायनों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती, एकीकृत खेती और जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की बात भी कही।
चौहान ने कहा कि आधुनिक तकनीक और कृषि से जुड़ी नई रिसर्च किसानों के खेतों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को किसानों के खेतों में जाकर उनकी समस्याओं को समझने और उसी के आधार पर रिसर्च करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने उद्योग जगत से कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए निवेश बढ़ाने की अपील की। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि CSR फंड का इस्तेमाल किसानों की ट्रेनिंग, क्षमता बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने में किया जा सकता है।

