पाकुड़, 27 अगस्त। पाकुड़ के प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने हत्या और जानलेवा हमले के मामले में दोषी सोबेन मरांडी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पुलिस अनुसंधान में सामने आई गंभीर लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए फैसले की प्रति मुख्य सचिव, डीजीपी और पाकुड़ एसपी को भेजने का निर्देश दिया है।
हत्या मामले में दोषी को आजीवन कारावास
अदालत ने सोबेन मरांडी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया। धारा 302 के तहत आजीवन सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना, धारा 307 के तहत आजीवन सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
इसके अलावा धारा 326 के तहत सात वर्ष सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये तथा धारा 452 के तहत पांच वर्ष सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत के निर्देश के अनुसार सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
पुलिस अनुसंधान में सामने आई लापरवाही
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस अनुसंधान से जुड़ी कई कमियां सामने आईं। अभियोजन की ओर से केवल पांच गवाह पेश किए गए। जांच अधिकारी कैला उरांव द्वारा जब्ती सूची, हत्या में इस्तेमाल हथियार, खून से सने कपड़े और इंजरी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई।
अदालत ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए फैसले की प्रति मुख्य सचिव, डीजीपी और पाकुड़ एसपी को भेजने का निर्देश दिया। इसके बावजूद लोक अभियोजक लुकास कुमार हेमरम की दलीलों और न्यायालय के हस्तक्षेप से अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में सफल रहा।
घायल पत्नी की गवाही बनी अहम आधार
मामले में मृतक की पत्नी की गवाही को अदालत ने विश्वसनीय माना। घटना के दौरान वह खुद भी घायल हुई थी। न्यायालय ने उससे कई सवाल पूछकर घटना और उसके घायल होने से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की।
अदालत के अनुसार, उसकी चश्मदीद गवाही दोषसिद्धि के लिए महत्वपूर्ण आधार बनी। अभियोजन पक्ष ने इसी गवाही के आधार पर घटना से जुड़े तथ्यों को अदालत के समक्ष मजबूती से रखा।
मृतक की पत्नी को मिलेगा दो लाख रुपये मुआवजा
अदालत ने दोषी पर लगाए गए कुल दो लाख रुपये के जुर्माने की राशि मृतक की पत्नी को मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकार को पीड़िता को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत अतिरिक्त मुआवजा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
इस फैसले के साथ अदालत ने एक ओर हत्या के दोषी को कठोर सजा सुनाई, वहीं दूसरी ओर पुलिस अनुसंधान में बरती गई लापरवाही को भी गंभीरता से लेते हुए संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित किया है।

