परिसीमन को लेकर सियासी घमासान, खरगे ने PM मोदी से ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाने की मांग की

परिसीमन को लेकर सियासी घमासान, खरगे ने PM मोदी से ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाने की मांग की

नई दिल्ली: परिसीमन और संसद के सत्रावसान को लेकर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाने की मांग की है।

खरगे ने कहा कि अगर सरकार संसद के विशेष सत्र में परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है, तो सभी राजनीतिक दलों को पहले प्रस्ताव को समझने और विस्तार से अध्ययन करने का पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

खरगे ने PM मोदी को क्या लिखा?

खरगे ने कहा कि उन्होंने इससे पहले भी 16 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन के मुद्दे पर सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की थी।

उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना जताई थी।

खरगे का कहना है कि अगर विशेष सत्र में परिसीमन का प्रस्ताव पेश किया जाना है, तो उससे पहले राजनीतिक दलों को इसकी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे प्रस्ताव का विस्तार से अध्ययन कर सकें।

कांग्रेस की तीन बड़ी मांगें

कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर अपना रुख भी साफ किया है। पार्टी की मांग है कि:

  • लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 साल तक बरकरार रखी जाए।
  • राज्यों को मिली मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या में अगले 25 साल तक बदलाव न किया जाए।
  • 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जाए।

परिसीमन पर क्यों है विवाद?

परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और संख्या का नए सिरे से निर्धारण करना है। विपक्ष को आशंका है कि अगर जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया गया, तो कुछ राज्यों को नुकसान हो सकता है।

खास तौर पर दक्षिणी राज्य लंबे समय से इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर करते रहे हैं। उनका तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया, उन्हें परिसीमन के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होना चाहिए।

वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि परिसीमन के दौरान किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा।

पहले भी सामने आ चुका है प्रस्ताव

इसी साल 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया था। हालांकि, इसे पारित करने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका।

वोटिंग में विधेयक के पक्ष में 298 वोट और विरोध में 230 वोट पड़े थे। अब एक बार फिर परिसीमन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच चर्चा और विवाद तेज हो गया है।

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