रूस पाकिस्तान तक बनाएगा रेलवे लाइन, भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?

रूस पाकिस्तान तक बनाएगा रेलवे लाइन, भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?

रूस पाकिस्तान तक एक नए रेलवे कॉरिडोर की योजना पर काम कर रहा है। इसे रूस-मध्य एशिया-हिंद महासागर रेल कॉरिडोर कहा जा रहा है। यह रेल मार्ग रूस को मध्य एशिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते हिंद महासागर से जोड़ने की योजना है।

इस प्रोजेक्ट से रूस और पाकिस्तान के बीच व्यापार और संपर्क और मजबूत हो सकता है। इसे भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

पाकिस्तान तक रेल लाइन बढ़ाने की योजना

रूस के उप-प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने बताया कि रूस, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से होते हुए अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते हिंद महासागर तक रेलवे नेटवर्क बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि रूस का परिवहन मंत्रालय इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है।

रूस-पाकिस्तान के रिश्ते हो रहे मजबूत

हाल के वर्षों में रूस और पाकिस्तान के संबंधों में नजदीकी बढ़ी है। पाकिस्तान ने रूस से रियायती दरों पर तेल भी खरीदा है। दोनों देशों के बीच समुद्री व्यापार भी बढ़ रहा है।

पहले रूस भारत के साथ अपने मजबूत संबंधों के कारण पाकिस्तान से दूरी बनाए रखता था, लेकिन अब दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है।

प्रोजेक्ट के सामने सुरक्षा चुनौती

इस रेलवे कॉरिडोर के सामने सुरक्षा बड़ी चुनौती हो सकती है। प्रस्तावित रेल मार्ग अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर गुजरेगा, जहां सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियां मौजूद हैं। अगर यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है तो रूस और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं।

“मुझे लगता है कि इसकी क्षमता स्वेज नहर की कल्पना से भी कहीं ज्यादा है। यह एक नई दुनिया खोल रहा है, और मैं कहूंगा कि भू-राजनीति को भू-अर्थशास्त्र से मजबूती मिल रही है, जहां सब कुछ कनेक्टिविटी और क्षेत्र के भले के लिए मिलकर काम करने और व्यापार व परिवहन के लिए सीमाएं खोलने के बारे में है-” मुशाहिद हुसैन, पाकिस्तानी सीनेटर

भारत के चाबहार प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है असर

भारत ईरान के चाबहार पोर्ट को विकसित कर रहा है। इसका मकसद मध्य एशिया और यूरोप के साथ व्यापार के लिए बेहतर रास्ता तैयार करना है।

अगर रूस का प्रस्तावित रेल कॉरिडोर हिंद महासागर तक पहुंच बना लेता है, तो चाबहार पोर्ट को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल सकती है। ऐसे में कुछ मध्य एशियाई और यूरोपीय देश व्यापार के लिए रूसी रेल मार्ग को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे भारत के चाबहार प्रोजेक्ट पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

पाकिस्तान के लिए ‘स्वेज नहर से बेहतर’ बताया गया

पाकिस्तान के सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने इस प्रस्तावित रेल कॉरिडोर की तारीफ की है। उन्होंने इसे ‘स्वेज नहर प्लस’ बताते हुए कहा कि इससे सामान पहुंचाने का समय काफी कम हो सकता है।

उनके मुताबिक, यह रेल नेटवर्क रूस और मध्य एशिया को अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ सकता है। इससे क्षेत्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिल सकता है।

रूस-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी

रूस और पाकिस्तान के बीच रिश्ते भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। रूस की फेडरेशन काउंसिल की अध्यक्ष वैलेंटिना मैटविएन्को ने पाकिस्तान को एशिया में रूस का महत्वपूर्ण साझेदार बताया है।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध सम्मान और आपसी फायदे पर आधारित हैं और लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

अगर यह रेल कॉरिडोर योजना आगे बढ़ती है, तो इससे रूस, मध्य एशिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संपर्क मजबूत हो सकता है। साथ ही, इसका भारत के चाबहार प्रोजेक्ट और क्षेत्रीय रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।

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