धनबाद, 21 अगस्त 2026। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में फर्स्ट ईयर के छात्रों के लिए मेंटल वेलनेस को लेकर विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। “हार्नेसिंग द पावर ऑफ माइंड” नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों को विचारों को व्यवस्थित करने, भावनाओं को नियंत्रित करने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संतुलित तरीके से निर्णय लेने के व्यावहारिक तरीके बताए गए।
फर्स्ट ईयर छात्रों के लिए आयोजित हुआ सेमिनार

डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) ऑफिस की ओर से 19 अगस्त को एनएलएचसी जी-3 में सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें बीटेक, एमटेक और पीएचडी के फर्स्ट ईयर छात्रों ने हिस्सा लिया।
सेमिनार में टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स के सीनियर प्रोफेशनल मोहिल देसाई ने छात्रों के साथ माइंड और इमोशंस को मैनेज करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने छात्रों को फोकस बनाए रखने, नकारात्मक सोच से बाहर निकलने और मानसिक मजबूती विकसित करने के तरीके बताए।
इम्पल्स कंट्रोल और इमोशनल बैलेंस पर जोर
मोहिल देसाई ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में प्रतिक्रिया देने से पहले सही और गलत के बीच अंतर समझना जरूरी है। उन्होंने छात्रों को अपने इम्पल्स पर नियंत्रण रखने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने सेल्फ-अवेयरनेस, सेल्फ-डिसिप्लिन, इमोशनल इंटेलिजेंस और पॉजिटिव माइंडसेट विकसित करने को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, अपने विचारों और भावनाओं को बेहतर तरीके से समझने से व्यक्ति मुश्किल परिस्थितियों में अधिक संतुलित निर्णय ले सकता है।
कठोपनिषद के रथ के उदाहरण से समझाया माइंड
सेमिनार में कठोपनिषद के रथ के उदाहरण के माध्यम से भी मन को समझाने का प्रयास किया गया। इसमें सेल्फ को रथ का मालिक, इंटेलिजेंस को सारथी, माइंड को लगाम और इंद्रियों को घोड़ों के रूप में बताया गया।
इस उदाहरण के जरिए छात्रों को समझाया गया कि अनुशासित मन और सही विवेक व्यक्ति को आत्म-नियंत्रण, संतुलन बनाए रखने और अपने लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं।
काउंसलर ने दिए मेंटल वेलनेस के प्रैक्टिकल टिप्स
कार्यक्रम के बाद इंस्टीट्यूट काउंसलर ऐश्वर्या राव ने छात्रों से बातचीत की और मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण बनाए रखने से जुड़े व्यावहारिक सुझाव दिए। वहीं, एसोसिएट डीन (स्टूडेंट्स वेलबीइंग) प्रो. एस. ए. साहू ने केस स्टडीज के जरिए सेशन का समापन किया।
उन्होंने छात्रों से अपनी हेल्थ और वेलबीइंग का हर स्तर पर ध्यान रखने की अपील की। कार्यक्रम का समन्वय केमिस्ट्री एंड केमिकल बायोलॉजी विभाग के प्रो. राजीव लक्कानिगा ने किया।

