झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार, 24 अगस्त 2026 को सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने 19 अप्रैल 2026 को हुई JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है।
याचिका में परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की जांच CBI या स्वतंत्र SIT से कराने की मांग भी की गई है। यह याचिका राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले से पहले दाखिल की गई थी। अब बदली हुई परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि इस मामले में आगे सुनवाई की जरूरत है या नहीं।
हाईकोर्ट ने नियुक्तियां रद्द करने पर लगाई रोक
इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को राज्य सरकार के एक फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। सरकार ने JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट ने इन नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगाते हुए राज्य सरकार और JPSC से जवाब मांगा है।
चयनित अभ्यर्थियों ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि अगर भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, बिना हर अभ्यर्थी की अलग-अलग जांच और सुनवाई किए उन उम्मीदवारों की नियुक्ति रद्द करना उचित नहीं है, जिन्होंने तय प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी और मेरिट के आधार पर चयन हासिल किया।
सरकार ने कई परीक्षाएं रद्द कीं
राज्य सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर 18 अगस्त की देर रात कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था।
सरकार ने 2014 के बाद हुई अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ियों की जांच का भी आदेश दिया। इसके बाद संबंधित विभाग की ओर से अधिसूचनाएं जारी कर 22 परीक्षाएं रद्द, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित और 17 अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने की जानकारी दी गई।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
सरकार के फैसले के बाद चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। वहीं, हाईकोर्ट द्वारा नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है।
अब सुप्रीम कोर्ट की 24 अगस्त की सुनवाई पर सभी की नजर है। हाईकोर्ट के अगले आदेश तक संबंधित नियुक्तियों पर सरकार के रद्द करने वाले फैसले का प्रभाव नहीं पड़ेगा।

