रांची: झारखंड में खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकार और राजस्व को लेकर राजनीति तेज हो गई है। विधायक जयराम महतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (MMDR Bill) का विरोध किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से विधेयक पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की मांग की है।
जयराम महतो ने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और देश को बड़ी मात्रा में खनिज संसाधन उपलब्ध कराता है। ऐसे में राज्य को खनिज सेस से वंचित करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री से झारखंड के हितों और राज्य की विकास संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर विचार करने का आग्रह किया है।
जयराम महतो ने खनिज सेस को बताया राज्य का अधिकार
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जयराम महतो ने कहा कि झारखंड के रैयतों ने खनन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर अपनी जमीन दी है। इसके कारण स्थानीय लोगों को विस्थापन, पलायन और प्रदूषण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जब राज्य के लोगों को खनन गतिविधियों का सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव झेलना पड़ता है, तब खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व में राज्य की हिस्सेदारी और उसके विकास की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
MMDR संशोधन विधेयक पर पुनर्विचार की मांग
जयराम महतो ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों की आर्थिक स्थिति, समेकित विकास की जरूरतों तथा जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए MMDR संशोधन विधेयक 2026 पर पुनर्विचार किया जाए।
उन्होंने विधेयक को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि झारखंड के हितों की रक्षा करना जरूरी है। उनके मुताबिक खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास और स्थानीय लोगों के हित में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
‘झारखंड के हक के लिए विरोध जारी रहेगा’
जयराम महतो ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि MMDR Bill को लेकर उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि झारखंड विरोधी विधेयक को वापस नहीं लिया गया तो राज्य के हक और अधिकार के लिए सड़क से सदन तक लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने और झारखंड की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की अपील की है।


