चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सरकार ने इसकी जमाखोरी रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी है।
नए आदेश के मुताबिक, जो बड़े उपभोक्ता हर महीने कम से कम 10 मीट्रिक टन चीनी का इस्तेमाल करते हैं, वे अपनी जरूरत के लिए 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। हालांकि, यह नियम केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेशों और स्थानीय निकायों पर लागू नहीं होगा।
किन लोगों और कंपनियों पर लागू होगा नियम?
सरकार के मुताबिक, बड़े उपभोक्ताओं में मिठाई की दुकानें, मिठाई बनाने वाली इकाइयां, शीतल पेय कंपनियां, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और अन्य संस्थागत खरीदार शामिल होंगे।
इसमें ऐसे खरीदार आएंगे, जो चालू महीने को छोड़कर पिछले एक साल में औसतन हर महीने कम से कम 10 मीट्रिक टन चीनी खरीदते या इस्तेमाल करते रहे हैं।
चीनी की बिक्री का होगा सत्यापन
सरकार ने चीनी मिलों को बड़े उपभोक्ताओं को की गई बिक्री का रिकॉर्ड रखने और उसका सत्यापन करने का निर्देश दिया है। यह बिक्री सीधे मिल से या डीलरों के जरिए की गई हो, दोनों मामलों में जानकारी देनी होगी।
चीनी की खपत का पता लगाने के लिए विक्रेता और खरीदारों की ओर से GST रिटर्न में इस्तेमाल किए गए HSN कोड की जानकारी का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
17 से 19 अगस्त की बिक्री का मांगा पूरा रिकॉर्ड
सरकार ने चीनी मिलों से 17, 18 और 19 अगस्त को हुई चीनी की बिक्री का पूरा ब्योरा मांगा है।
मिलों को हर बिक्री के बारे में अलग-अलग जानकारी देनी होगी, जिसमें:
- कितनी चीनी बेची गई
- किस कीमत पर बेची गई
- बिक्री किस तारीख को हुई
- खरीदार का नाम और पूरा पता
- खरीदार का मोबाइल या फोन नंबर
- GST नंबर
- बिक्री की मात्रा क्विंटल में
- कीमत रुपये प्रति क्विंटल
सरकार ने यह भी कहा है कि अगर एक ही दिन अलग-अलग खरीदारों को अलग-अलग कीमत पर चीनी बेची गई है, तो हर सौदे का अलग रिकॉर्ड देना होगा।
सरकार के इस कदम का मकसद बड़े खरीदारों द्वारा जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने पर रोक लगाना और बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है।

