धनबाद, 20 अगस्त 2026। आदिवासी छात्रों को डिजिटल तकनीक और आईटी स्किल्स से जोड़ने के उद्देश्य से आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में दो दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हुआ। 20 और 21 अगस्त को आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्रों को बेसिक से लेकर एडवांस कंप्यूटर और डेटा एनालिसिस स्किल्स की जानकारी दी जा रही है।
यह कार्यक्रम आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के मैनेजमेंट स्टडीज एवं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) फॉर ट्राइबल वेलफेयर के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार का सहयोग मिल रहा है।
छह एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों के छात्र ले रहे प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम में झारखंड के छह एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) के कक्षा 10, 11 और 12 के विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। इनमें EMRS बसिया, सालगाडीह, तमाड़, तसरिया, काठीजोरिया और तोरसिंदरी के छात्र शामिल हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक की व्यावहारिक जानकारी देने के साथ उन्हें उच्च शिक्षा और भविष्य के करियर के लिए तैयार करना है।
MS Office, Tally और Python की दी जा रही जानकारी
ट्रेनिंग के दौरान छात्रों को बेसिक और एडवांस आईटी एवं कंप्यूटर स्किल्स से परिचित कराया जा रहा है। बेसिक मॉड्यूल में MS Office, Tally और Python Programming को शामिल किया गया है।
वहीं एडवांस मॉड्यूल में Advanced Excel के माध्यम से डेटा एनालिसिस, स्प्रेडशीट मैनेजमेंट और रिपोर्टिंग जैसे कौशल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। छात्रों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय लाइव डेमो, इंटरएक्टिव डिस्कशन और हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल के जरिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
डिजिटल स्किल्स से बढ़ेगा छात्रों का आत्मविश्वास
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के मैनेजमेंट स्टडीज एवं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर रश्मि सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का फोकस आदिवासी छात्रों को ऐसी डिजिटल स्किल्स उपलब्ध कराना है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़े और वे उच्च शिक्षा तथा भविष्य के करियर के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
प्रोफेसर निलाद्रि दास ने कहा कि हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग से विद्यार्थियों को तकनीक को बेहतर ढंग से समझने और उसे कक्षा के बाहर भी इस्तेमाल करने का आत्मविश्वास मिलता है।
डिजिटल गैप कम करने की दिशा में पहल
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की ओर से जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से चलाए जा रहे प्रोजेक्ट के तहत इस तरह के कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य आदिवासी युवाओं को डिजिटल तकनीक और इंडस्ट्री से जुड़े कौशल से जोड़ना है।
संस्थान का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्राइबल वेलफेयर आदिवासी समुदायों के लिए शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल इनक्लूजन से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। ट्रेनिंग और इवैल्यूएशन से जुड़ी गतिविधियां आईआईटी (आईएसएम) की विजिटिंग टीमों द्वारा संचालित की जा रही हैं।

