रांची। JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के बैनर तले आंदोलन कर रहे छात्रों ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की है। छात्रों ने परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच की अनुशंसा के लिए राज्य सरकार को 60 दिनों का समय दिया है। छात्रों के इस फैसले के बाद भाजपा नेता ने भी अपना प्रस्तावित एकदिवसीय सांकेतिक अनशन स्थगित करने की घोषणा की है।
छात्रों के निर्णय का किया सम्मान
भाजपा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि आंदोलनरत छात्रों के संघर्ष, समर्पण और सरोकार को नमन किया जाता है। छात्रों की घोषणा का सम्मान करते हुए प्रस्तावित एकदिवसीय सांकेतिक अनशन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
बयान के अनुसार, आंदोलनरत छात्रों के मंच से सरकार को चेतावनी दी गई थी कि यदि एक सप्ताह के भीतर छात्रों की मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो भगवान बिरसा मुंडा स्मारक स्थल पर उत्पाद सिपाही भर्ती दौड़ के दौरान जान गंवाने वाले 19 अभ्यर्थियों को श्रद्धांजलि देते हुए एकदिवसीय अनशन किया जाएगा। छात्रों के आंदोलन को भाजपा की ओर से नैतिक समर्थन दिए जाने की बात भी कही गई है।
CBI जांच की मांग पर सरकार से फैसला लेने की अपील
बयान में कहा गया कि छात्रों की कुछ मांगों पर सरकार ने निर्णय लिया है, लेकिन उनकी प्रमुख मांग परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की CBI जांच है। इसके लिए छात्रों ने सरकार को 60 दिनों का समय दिया है।
भाजपा ने राज्य सरकार से मांग की है कि भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं की CBI जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
उत्पाद सिपाही भर्ती में मृत 19 अभ्यर्थियों के मुआवजे की मांग
बयान में उत्पाद सिपाही भर्ती की दौड़ के दौरान जान गंवाने वाले 19 झारखंडी-मूलवासी अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी की गई है।
भाजपा का कहना है कि इन अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए और सरकार को इस दिशा में आवश्यक कदम उठाना चाहिए।
JSSC-CGL अभ्यर्थियों के मामले में व्यापक जांच की मांग
JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भाजपा ने कहा कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के बजाय योग्य और कथित तौर पर दागदार अभ्यर्थियों के बीच अंतर किया जाना चाहिए। बयान में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेशों का हवाला देते हुए व्यापक जांच की जरूरत बताई गई है।
भाजपा ने कहा कि जो अभ्यर्थी मेरिट के आधार पर चयनित हुए हैं, उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। वहीं, लेन-देन के जरिए नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई और नौकरी से बर्खास्तगी की मांग की गई है।
सरकार के सामने 60 दिनों की चुनौती
छात्रों द्वारा आंदोलन स्थगित किए जाने के बाद अब सरकार के सामने 60 दिनों के भीतर उनकी प्रमुख मांग पर निर्णय लेने की चुनौती है। इस अवधि में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और JSSC-CGL समेत अन्य परीक्षाओं को लेकर सरकार के अगले कदम पर छात्रों और राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।

