भुवनेश्वर। ओडिशा इस समय हाल के वर्षों की गंभीर बाढ़ की स्थिति का सामना कर रहा है। लगातार भारी बारिश के कारण कई जिलों के गांवों, खेतों और निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
राज्य सरकार के शुरुआती आकलन के अनुसार, बाढ़ का असर करीब 13 लाख लोगों तक पहुंचा है। प्रभावित स्थिति 74 ब्लॉक और 1,361 गांवों में बताई गई है।
राहत और बचाव अभियान के तहत करीब 3 लाख लोगों को बचाया या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। अभियान में लगभग 45 ओड्राफ टीम, 8 एनडीआरएफ टीम और 59 फायर एंड इमरजेंसी सर्विस टीम तैनात हैं। प्रभावित इलाकों में करीब 550 राहत शिविर बनाए गए हैं।
जाजपुर और भद्रक में बाढ़ का व्यापक असर
जाजपुर बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल है। यहां करीब 77,680 लोगों को बचाया या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में 203 राहत शिविर बनाए गए हैं। बचाव अभियान में 9 ओड्राफ टीम, 2 एनडीआरएफ टीम और 12 फायर एंड इमरजेंसी सर्विस टीम काम कर रही हैं।
भद्रक जिले में भी बाढ़ का व्यापक असर पड़ा है। यहां 4 ब्लॉक और एक नगरपालिका क्षेत्र के 149 गांव प्रभावित हुए हैं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, करीब 2.59 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि लगभग 1.96 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में करीब 90 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं और 15 ओड्राफ टीम तैनात हैं।
सरकार के प्रारंभिक आकलन में जाजपुर, भद्रक, बालेश्वर, केंदुझर, मयूरभंज और केंद्रापड़ा को अधिक प्रभावित जिलों में शामिल किया गया है। जगतसिंहपुर और पुरी में भी लगातार बारिश और बाढ़ का असर देखा जा रहा है।
किसानों के लिए फसल नुकसान पर सहायता का प्रावधान
बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए सरकार ने कुल 1,000 करोड़ रुपये के सहायता पैकेज की घोषणा की है। इसमें तत्काल राहत के साथ लोगों की आजीविका को दोबारा खड़ा करने के लिए सहायता देने का प्रावधान है।
सरकार के अनुसार, 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान वाले किसानों को निर्धारित नियमों के तहत कृषि इनपुट सहायता दी जाएगी। बारिश पर निर्भर फसलों के नुकसान के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचाई वाले क्षेत्र में 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बारहमासी फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता प्रस्तावित है।
यह सहायता वास्तविक नुकसान के आकलन और सत्यापन के बाद जारी की जाएगी। सहायता डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में देने की बात कही गई है।
प्रभावित किसानों को अगली खेती के लिए बीज और दूसरी जरूरी कृषि सामग्री उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, पात्र लाभार्थियों को आजीविका दोबारा शुरू करने के लिए मिलिंग किट मुफ्त देने और 75 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
पशुपालन, मछली पालन और घरेलू नुकसान के लिए भी सहायता
राहत पैकेज में पशुपालन और मछली पालन से जुड़े नुकसान को भी शामिल किया गया है। पशुओं और पशु शेड को हुए नुकसान के लिए सहायता का प्रावधान है। मछुआरों को नाव, मछली पकड़ने के जाल और तालाबों को हुए नुकसान पर सहायता दी जाएगी।
बाढ़ प्रभावित परिवारों को जरूरी आजीविका संबंधी सामान खरीदने या खराब सामान बदलने के लिए 5,000 रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। राहत शिविरों में पका हुआ भोजन, सूखा राशन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार ने कहा है कि लोगों के सुरक्षित घर लौटने और सामान्य स्थिति बहाल होने तक राहत कार्य जारी रहेंगे। प्रभावित परिवारों को बर्तन, कपड़े और अन्य जरूरी घरेलू सामान उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी अलर्ट
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। पानी जमा रहने से संक्रमण और पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ने की स्थिति में मेडिकल टीमों को निगरानी रखने के लिए कहा गया है।
राहत शिविरों में स्वास्थ्य निगरानी के साथ बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सांप के काटने जैसी आपात स्थितियों को देखते हुए एंटी-वेनम इंजेक्शन और जरूरी दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है।
सरकार के अनुसार, पहली बाढ़ के दौरान करीब 26 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे। दूसरे चरण के लिए करीब 110 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की गई है। इस तरह अब तक घोषित राहत राशि करीब 136 करोड़ रुपये है, जबकि व्यापक सहायता के लिए कुल 1,000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा पैकेज शुरुआती आकलन पर आधारित है। पानी उतरने के बाद नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद जरूरत के अनुसार राहत और पुनर्वास सहायता बढ़ाई जा सकती है।

