80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से गूंजा ‘वंदे मातरम्’, राष्ट्रीय गीत के 150 साल पूरे होने पर विशेष आयोजन

80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से गूंजा ‘वंदे मातरम्’, राष्ट्रीय गीत के 150 साल पूरे होने पर विशेष आयोजन

नई दिल्ली: देश शनिवार को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर पर राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराकर समारोह का नेतृत्व किया। इस वर्ष का आयोजन राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के कारण भी विशेष रहा।

लाल किले की प्राचीर को फूलों से सजाया गया था। सजावट के बीच राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था और दोनों ओर हिंदी में ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया था। समारोह के दौरान सेना के बैंड ने राष्ट्रीय गीत की धुन प्रस्तुत की, जिसके बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ गाया।

प्रधानमंत्री ने फहराया राष्ट्रीय ध्वज

कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी गई।

समारोह के दौरान भारतीय वायुसेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने कार्यक्रम स्थल के ऊपर से पुष्पवर्षा की। इनमें से एक हेलीकॉप्टर के साथ राष्ट्रीय ध्वज था, जबकि दूसरे पर ‘वंदे मातरम्’ अंकित ध्वज दिखाई दिया।

1875 में हुई थी ‘वंदे मातरम्’ की रचना

‘वंदे मातरम्’ की रचना साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने वर्ष 1875 में की थी। बाद में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया, जो 1882 में प्रकाशित हुआ।

उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार ‘वंदे मातरम्’ की रचना 7 नवंबर 1875 को हुई थी और इसका शुरुआती प्रकाशन साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में हुआ था। इसलिए इसकी रचना को केवल 1882 से जोड़ना सही नहीं माना जाता। 1875 में रचना और शुरुआती प्रकाशन के बाद यह 1882 में ‘आनंदमठ’ का हिस्सा बना।

स्वतंत्रता आंदोलन में बना प्रेरणा का प्रतीक

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने लोगों में राष्ट्रभावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खासकर 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान यह आंदोलन के प्रमुख नारों में शामिल हो गया।

7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल की ओर निकले जुलूस में बड़ी संख्या में छात्रों ने ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष किया था। इसी दौर में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने का आंदोलन भी तेज हुआ।

बाद में कांग्रेस के वाराणसी अधिवेशन में भी इसे राष्ट्रीय आयोजनों के गीत के रूप में स्थान मिला। धीरे-धीरे ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज और राष्ट्रभक्ति की भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।

1950 में राष्ट्रीय गीत के रूप में मिली मान्यता

स्वतंत्र भारत में वर्ष 1950 में संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम्’ को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। इसका सरल अर्थ मातृभूमि को नमन करने से जुड़ा है।

‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्र सरकार की ओर से वर्षभर विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन की शुरुआत की गई थी। 80वें स्वतंत्रता दिवस के समारोह में भी राष्ट्रीय गीत को विशेष स्थान दिया गया।

इस तरह 15 अगस्त 2026 का स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की आजादी की 80वीं वर्षगांठ के साथ-साथ ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति से भी जुड़ा रहा।

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