रांची। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर झारखंड सरकार ने चिंता जताई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर कहा है कि प्रस्तावित संशोधन से झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों की आय पर असर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि विधेयक पर झारखंड की चिंताओं को गंभीरता से देखा जाए।
खनन से झारखंड को बड़ी आय
मुख्यमंत्री के पत्र के अनुसार, झारखंड की अपनी गैर-कर आय का करीब 84.9 प्रतिशत हिस्सा खनन क्षेत्र से आता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में झारखंड को मिनरल बियरिंग लैंड सेस से करीब 1,379 करोड़ रुपये मिले थे। वहीं 2025-26 में यह राशि बढ़कर करीब 7,488 करोड़ रुपये हो गई।
मौजूदा अनुमान के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस मद से करीब 13,215 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री का कहना है कि खनन से मिलने वाला राजस्व राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

मंईयां सम्मान समेत योजनाओं पर पड़ सकता है असर
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि इस योजना से 50 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक सहायता मिल रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास और आधारभूत ढांचे से जुड़ी कई योजनाएं भी राज्य के राजस्व पर निर्भर हैं।
हेमंत सोरेन ने आशंका जताई कि अगर खनिजों से राज्य की आय जुटाने की क्षमता कम होती है, तो झारखंड को हर साल हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इसका असर विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों और खनन प्रभावित इलाकों के विकास कार्यों पर पड़ने की संभावना है।
यह सिर्फ वित्तीय नहीं, संघीय ढांचे से जुड़ा मुद्दा
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि यह संशोधन केवल वित्तीय विषय नहीं है, बल्कि संविधान में निहित संघीय व्यवस्था, राज्यों की विधायी स्वायत्तता और खनिज उत्पादक राज्यों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है. पत्र में सुप्रीम कोर्ट के Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India Ltd. मामले के फैसले का भी हवाला दिया गया है.
मुख्यमंत्री के मुताबिक, संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 49 के तहत राज्यों को खनिज वहन भूमि पर कर या उपकर लगाने का अधिकार प्राप्त है.
इसी संवैधानिक व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप झारखंड विधानसभा ने झारखंड मिनरल बियरिंग लैंड सेस अधिनियम, 2024 पारित किया था.
मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस कानून का उद्देश्य सिर्फ राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण आधारभूत संरचना और अन्य कल्याणकारी कार्यों के लिए संसाधन उपलब्ध कराना भी था.
खनिज संपदा सिर्फ आर्थिक लाभ का विषय नहीं
सीएम हेमंत सोरेन ने पत्र में झारखंड के आदिवासी और खनन प्रभावित क्षेत्रों की सामाजिक-पर्यावरणीय चुनौतियों का भी उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों ने औद्योगिक विकास की सामाजिक और पर्यावरणीय लागत लंबे समय से वहन की है.
विस्थापन, भूमि से वंचित होना, पर्यावरणीय नुकसान, प्रदूषण, पारंपरिक आजीविका को नुकसान और सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना भी इन्हीं समुदायों को करना पड़ा है.
मुख्यमंत्री ने इसी आधार पर कहा है कि खनिज संपदा से पैदा होने वाले आर्थिक मूल्य का न्यायसंगत हिस्सा उन क्षेत्रों और समुदायों के कल्याण के लिए उपलब्ध रहना चाहिए, जहां से यह संपदा प्राप्त होती है.
सीएम हेमंत सोरेन ने पत्र के अंत में झारखंड की जनता की वित्तीय और सामाजिक चिंताओं को राष्ट्रपति के समक्ष रखते हुए उनसे इस विषय पर ध्यान देने का आग्रह किया है. मुख्यमंत्री का तर्क है कि प्रस्तावित संशोधन यदि राज्य की उपकर लगाने की शक्ति को सीमित करता है, तो इससे झारखंड के विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों पर बड़ा असर पड़ सकता है.

