पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने ‘लोकतंत्र सेनानियों’ के लिए कई बड़ी सुविधाओं का ऐलान किया है। रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने हर महीने 10 हजार रुपये की पेंशन, सरकारी बसों में मुफ्त सफर और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज देने की घोषणा की।
325 लोकतंत्र सेनानियों को किया सम्मानित
राज्य सचिवालय नबन्ना में आयोजित कार्यक्रम में कुल 325 लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान सभी को सम्मान के तौर पर तांबे का मेडल भी दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लोगों के योगदान को सम्मान देने के लिए सरकार की ओर से ये सुविधाएं दी जाएंगी।
परिवार को भी मिलेगा लाभ
सरकार ने यह भी घोषणा की कि सम्मानित किए गए किसी व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है, तो उसके पति या पत्नी को भी इन सभी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
इसमें 10 हजार रुपये का मासिक भत्ता, सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज शामिल है।
कौन हैं लोकतंत्र सेनानी
‘लोकतंत्र सेनानी’ (लोकतंत्र के लिए लड़ने वाले) उन लोगों को कहा जाता है जिन्हें 1975 और 1977 के बीच लगी आंतरिक इमरजेंसी के दौरान मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) या डीआईआर (डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स) जैसे कानूनों के तहत जेल में डाला गया था.
इमरजेंसी के मुश्किल दिनों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में एक लाख लोगों को जेल में डाला गया था. अकेले बंगाल में कम से कम 5,000 लोग जेल गए थे. उस समय जेल के अंधेरे में अपनी जिंदगी बिताने वाले लोगों के त्याग की वजह से ही आज देश में लोकतंत्र, संसदीय लोकतंत्र और वोटिंग के अधिकार की आवाज को दबाने की बुरी कोशिशों के बावजूद ये चीजें सुरक्षित हैं.
इस मौके पर अधिकारी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को भी याद किया. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले राष्ट्रवाद, देशभक्ति और पारंपरिक संस्कृति को मिटाने की कोशिशें की गई थीं. अधिकारी ने कहा कि आज की पीढ़ी को उनके योगदान के बारे में बताया जाना चाहिए. इसलिए, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर, 13 अगस्त को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक विशेष समिति बनाई जाएगी.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस समिति के जरिए श्यामा प्रसाद की विचारधारा और बंगाल के बंटवारे का सही इतिहास स्कूली किताबों के सिलेबस में शामिल किया जाएगा.

