यौन उत्पीड़न मामले में अदालत से बरी होने के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह ने विपक्ष और अपने आलोचकों पर निशाना साधा।
गोंडा के नंदिनी नगर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे उन्होंने कोई बड़ा अपराध किया हो।
‘मुझे गलत तरीके से बदनाम किया गया’
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन पर लगे आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। उनके मुताबिक, आरोपों में कहा गया कि उन्होंने मेडल देते समय किसी खिलाड़ी को छुआ था, लेकिन उन्हें ऐसे दिखाया गया जैसे उन्होंने कोई गंभीर अपराध किया हो।
‘मेरे खिलाफ कई लोग एकजुट हो गए थे’
उन्होंने दावा किया कि इस मामले में विपक्षी दलों के साथ कई संगठन भी शामिल थे। उनका कहना है कि उनके पास 42 लोगों, संगठनों और राजनीतिक दलों की सूची है, जिन्होंने उनके खिलाफ अभियान चलाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ उद्योगपतियों ने भी इस अभियान को आर्थिक मदद दी।
‘मुझे जिंदा जलाने तक की मांग हुई’
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ इतना माहौल बनाया गया कि उन्हें जिंदा जलाने तक की मांग की गई। उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा था और अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। उनके मुताबिक, अदालत के फैसले से सच्चाई सामने आ गई।
बृजभूषण ने किया था फैसले का स्वागत
बुधवार को बृजभूषण शरण सिंह ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि अदालत ने उनके सम्मान को ध्यान में रखते हुए उन्हें पूरी तरह आरोपों से मुक्त किया है। उन्होंने न्याय प्रक्रिया की तारीफ करते हुए कहा, ‘कल न्यायपालिका ने सम्मान शब्द का इस्तेमाल किया और 18 जनवरी 2023 को लगाए गए आरोपों से मुझे पूरी तरह बरी कर दिया।
इसके लिए हम न्यायिक प्रक्रिया का धन्यवाद करते हैं।’ बता दें कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर को महिला पहलवानों की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों वाले मामले में बरी कर दिया था।
बंद कमरे में हुई थी मामले की सुनवाई
यौन उत्पीड़न का यह मामला उस समय का है, जब बृजभूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष थे। महिला पहलवानों की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की थी।
पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता यानी कि IPC की धाराओं 354, 354D, 354A, 506(1) और 109 के तहत आरोप लगाए थे। इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार की अदालत में हुई। सुनवाई बंद कमरे में की गई थी। अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया।

