बलूचिस्तान के कुछ नेताओं ने 11 अगस्त को अपना ‘स्वतंत्रता दिवस’ घोषित किया है। उन्होंने दुनिया के देशों से अपील की है कि बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में मान्यता दी जाए। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत भी भविष्य में बलूचिस्तान को अलग देश के तौर पर मान्यता देगा।
राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अपील
बलोच नेता मीर यार बलोच ने लोगों से कहा कि 11 अगस्त को अपने घरों, बाजारों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बलूचिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज फहराएं। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को इस दिन का महत्व बताना है।
हर साल मनाया जाएगा स्वतंत्रता दिवस
‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 11 अगस्त को हर साल स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की अपील की गई।
पाकिस्तान पर लगाए कई आरोप
अपने बयान में बलोच नेताओं ने पाकिस्तान की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि इन नीतियों की वजह से क्षेत्र में लंबे समय से संघर्ष, अस्थिरता और कई बड़े विवाद पैदा हुए। बयान में कश्मीर, 1948 में बलूचिस्तान में हुई सैन्य कार्रवाई, 1971 के पूर्वी पाकिस्तान संघर्ष और अन्य ऐतिहासिक घटनाओं का भी जिक्र किया गया।
फिलहाल, बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त नहीं है और भारत सरकार की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
क्या भारत देगा मान्यता?
बलूचिस्तान गणराज्य का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपने मौजूदा स्वरूप में बना रहेगा, तब तक स्थायी शांति, विकास और समृद्धि हासिल नहीं की जा सकती। संगठन ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता देने और उसके पक्ष का समर्थन करने का आग्रह किया।
ग्रुप के बयान के मुताबिक बलूचिस्तान ने सबसे पहले 11 अगस्त 1947 को अपनी आजादी का ऐलान किया था जब उपमहाद्वीप से ब्रिटिश शासन हट रहा था। ग्रुप का दावा है कि इस ऐलान की खबर को ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ समेत अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने छापा था और ‘ऑल इंडिया रेडियो’ ने इसका प्रसारण भी किया था। इसीलिए बलूच 11 अगस्त को आजादी का दिन मानते हैं और इसीलिए इसे ‘स्वतंत्रता दिवस’ के दिन के तौर पर चुना गया है।

