दिल्ली में कचरे की समस्या को कम करने के लिए एमसीडी ओखला और तेहखंड लैंडफिल साइट पर दो नए बायो-सीबीजी (कम्प्रेस्ड बायो-गैस) प्लांट लगाएगी। इन प्लांटों के शुरू होने के बाद हर दिन 800 टन गीले कचरे का निस्तारण किया जा सकेगा।
इस परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, महापौर प्रवेश वाही, इंडियन ऑयल और एमसीडी के अधिकारियों की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
योजना के तहत तेहखंड में 500 टन प्रतिदिन क्षमता का प्लांट और ओखला में 300 टन प्रतिदिन क्षमता का प्लांट लगाया जाएगा। इन प्लांटों में गीले कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG) और जैविक खाद तैयार की जाएगी।
इस परियोजना से लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम होगी और स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस योजना को एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी करीब 200 करोड़ रुपये की लागत इंडियन ऑयल उठाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में हर दिन करीब 13,500 टन ठोस कचरा निकलता है, जबकि फिलहाल केवल 7,500 टन कचरे का ही निस्तारण हो पाता है। ऐसे में नए बायो-सीबीजी प्लांट कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
ओखला में ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ लक्ष्य को मिलेगी गति
उन्होंने कहा कि इससे पहले राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ भी गोबर से हरित ऊर्जा उत्पादन के लिए समझौता किया गया था और यह एमओयू उसी दिशा में अगला कदम है। महापौर प्रवेश वाही ने कहा कि तेहखंड और ओखला में प्रस्तावित संयंत्र एमसीडी के ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ लक्ष्य को गति देंगे।
इनसे लैंडफिल पर दबाव कम होगा, स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद का उत्पादन होगा तथा स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के सहयोग से एमसीडी भविष्य में भी वैज्ञानिक और टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं को आगे बढ़ाती रहेगी।
