केरल के एक कंज्यूमर कोर्ट ने फेडरल बैंक को अपनी सेवा में लापरवाही का दोषी माना है। मामला एक ऐसे ग्राहक का है, जिसका इंटरनेशनल डेबिट कार्ड बैंक ने बिना किसी सूचना के ब्लॉक कर दिया था। इसके कारण उसे अपने परिवार के साथ कुवैत एयरपोर्ट पर परेशानी का सामना करना पड़ा।
क्या है मामला?
शिकायतकर्ता पॉल साल 2015 से फेडरल बैंक के NRE ग्राहक हैं। बैंक ने उन्हें एक इंटरनेशनल डेबिट कार्ड दिया था, जिसकी वैधता दिसंबर 2023 तक थी। इस कार्ड के जरिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट लाउंज में मुफ्त प्रवेश की सुविधा भी मिलती थी।
जब पॉल अपने परिवार के साथ कुवैत से कोच्चि लौट रहे थे, तब उन्होंने कुवैत एयरपोर्ट के इंटरनेशनल लाउंज में इस कार्ड का इस्तेमाल किया। लेकिन कार्ड काम नहीं किया और स्क्रीन पर “Card Failure” का संदेश दिखाई दिया। इसके कारण पॉल, उनकी पत्नी और बच्चों को लाउंज में प्रवेश नहीं मिल सका।
पॉल ने बताया कि उनके बैंक खाते में पर्याप्त पैसे मौजूद थे। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि कार्ड ब्लॉक कर दिया गया है। इसलिए उन्होंने कोई दूसरा भुगतान का तरीका भी साथ नहीं रखा था। अचानक कार्ड बंद होने से उन्हें विदेश में काफी परेशानी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
इस मामले की सुनवाई के बाद कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक की सेवा को दोषपूर्ण माना और ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया।
बैंक ने दी सफाई
इस मामले पर फेडरल बैंक ने बताया कि 10 अगस्त 2021 को मास्टर कार्ड से सुरक्षा संबंधी अलर्ट मिला था. इसमें आशंका जताई गई थी कि कार्ड की जानकारी से समझौता हो सकता है. बैंक ने कहा कि ग्राहक को धोखाधड़ी से बचाने के लिए कार्ड को ब्लॉक करना जरूरी था. बैंक का कहना था कि उन्होंने SMS के जरिए ग्राहक को इस बारे में बता दिया था.
उपभोक्ता आयोग ने क्या कहा?
आयोग ने कहा कि पॉल ने नया कार्ड जारी करने की मांग नहीं की थी और न ही पुराने कार्ड को उसकी वैधता खत्म होने से पहले ब्लॉक करने की सहमति दी थी. बैंक ने भी ये साबित नहीं किया कि ग्राहक को भरोसेमंद तरीके से कार्ड ब्लॉक होने और नया कार्ड जारी किए जाने की जानकारी दी गई थी.
जिसके बाद आयोग ने बैंक को मानसिक परेशानी, कठिनाई और तनाव के लिए 1 लाख रुपये मुआवजा और 25,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया.

