नई दिल्ली: शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली भूख हड़ताल समाप्त कर दी। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन तोड़ा। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो भी मौजूद रहीं।
छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने देशभर के छात्रों और युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के कई सांसदों ने उनसे अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया था। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही वे एक अलग संदेश के माध्यम से अनशन समाप्त करने के पीछे की परिस्थितियों और अन्य पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देंगे।
26 दिनों में करीब 11 किलो वजन घटा
सोनम वांगचुक ने 28 जून से भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका कहना था कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे। इस दौरान उनका लगभग 11 किलोग्राम वजन कम हो गया। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल और बाद में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्रधानमंत्री ने दी स्वास्थ्य की शुभकामनाएं
अनशन समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने लिखा कि सोनम वांगचुक डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ होकर अपना सामान्य स्वास्थ्य प्राप्त करें।

