नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर मुख्यधारा (मेनस्ट्रीम) मीडिया की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। कई सोशल मीडिया पोस्ट और यूजर्स का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने कुछ मुख्यधारा के न्यूज चैनलों का बहिष्कार किया है और आंदोलन को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए व्यापक समर्थन मिल रहा है।
सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे पोस्टों में कहा जा रहा है कि अब आंदोलनों को व्यापक समर्थन पाने के लिए मुख्यधारा के मीडिया पर पहले जैसी निर्भरता नहीं रह गई है। इन पोस्टों में यह भी दावा किया गया कि डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के कारण लोग सीधे वैकल्पिक माध्यमों से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
वहीं, कुछ यूजर्स ने मुख्यधारा के मीडिया की विश्वसनीयता और उसकी रिपोर्टिंग शैली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मीडिया की साख प्रभावित हुई है, जिसके कारण दर्शकों का एक वर्ग स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया की ओर अधिक रुख कर रहा है।
हालांकि, दूसरी ओर मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यधारा का मीडिया अब भी देश में समाचारों के सबसे बड़े स्रोतों में शामिल है। उनका कहना है कि टीवी, डिजिटल पोर्टल, अखबार और सोशल मीडिया सभी सूचना तंत्र का हिस्सा हैं और प्रत्येक माध्यम की अपनी अलग भूमिका एवं दर्शक वर्ग है।
जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर यह बहस लगातार जारी है कि बदलते डिजिटल दौर में समाचार उपभोग का स्वरूप किस तरह बदल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सूचना के स्रोतों में विविधता बढ़ी है, लेकिन किसी एक माध्यम को पूरी तरह अप्रासंगिक मानना उचित नहीं होगा।
फिलहाल, जंतर-मंतर का आंदोलन और उससे जुड़ी चर्चाएं सोशल मीडिया के साथ-साथ विभिन्न समाचार माध्यमों में भी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

