जमुई: डिजिटल दौर में जहां सोशल मीडिया और मोबाइल तकनीक लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं, वहीं जमुई जिले के मलयपुर निवासी स्नेक कैचर बंटी सिंह इन माध्यमों का उपयोग मानव जीवन और वन्यजीव संरक्षण के लिए कर रहे हैं। जिले के किसी भी इलाके से सांप निकलने की सूचना मिलते ही वे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से उसका रेस्क्यू करते हैं।
बंटी सिंह के अनुसार, अब तक उनकी टीम 1,000 से अधिक जहरीले और गैर-जहरीले सांपों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर चुकी है। रेस्क्यू के बाद सांपों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाता है, जिससे इंसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
गंगटा जंगल में छोड़े जाते हैं रेस्क्यू किए गए सांप
रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद पकड़े गए सांपों को जमुई-लक्ष्मीपुर मार्ग स्थित गंगटा जंगल में सुरक्षित छोड़ा जाता है। बंटी सिंह का कहना है कि सांपों को मारने के बजाय उन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ना ही सबसे बेहतर विकल्प है। इससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
सोशल मीडिया से फैला जागरूकता अभियान
बंटी सिंह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को सांपों की पहचान, जहरीले और गैर-जहरीले सांपों के बीच अंतर, सांप काटने पर प्राथमिक उपचार और बचाव के सही तरीकों की जानकारी भी देते हैं। उनके जागरूकता अभियान का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है और लोगों में सांपों के प्रति अनावश्यक भय तथा उन्हें मारने की घटनाओं में कमी आई है।
बिना प्रशिक्षण के न करें रेस्क्यू का प्रयास
विशेषज्ञों का कहना है कि सांप पकड़ना बेहद जोखिम भरा कार्य है। बिना प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरणों के किसी भी व्यक्ति को सांप पकड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को ही सूचना देना सबसे सुरक्षित उपाय माना जाता है।
वन्यजीव संरक्षण में निभा रहे अहम भूमिका
डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से बंटी सिंह का कार्य अब अधिक लोगों तक पहुंच रहा है। उनके रेस्क्यू वीडियो और जागरूकता संदेश हजारों लोगों तक पहुंचकर वन्यजीव संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनका यह प्रयास न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।

