कराची: पाकिस्तान इन दिनों कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। आर्थिक समस्याओं के बीच अब देश में बिजली संकट भी बढ़ता नजर आ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंध प्रांत के शिक्षा विभाग के कई बड़े सरकारी दफ्तरों में पिछले करीब तीन हफ्तों से बिजली नहीं है। इसके कारण ऑनलाइन सेवाएं, सरकारी कामकाज और लोगों से जुड़े कई जरूरी कार्य प्रभावित हो गए हैं। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी बिजली बिलों का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई है। बिजली न होने से विभाग का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सिंध प्रांत में जारी इस बिजली संकट का असर वहां के कई कार्यालयों पर साफ-साफ देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट की माने तो डायरेक्टोरेट जनरल कॉलेजेस सिंध हो, रीजनल डायरेक्टोरेट गवर्नमेंट कॉलेजेस सिंध, या फिर रीजनल डायरेक्टोरेट प्राइवेट स्कूल्स कराची ये स्कूल। इन सभी स्कूलों और कॉलेजेस के कार्यालय बिजली संकट की मार झेल रहे हैं। इतना ही नहीं कामकाज के समय में घंटों बिजली गुल रहने की वजह से सरकारी कामकाज पूरी तरह रुक गया है।
बिजली न होने के कारण दफ्तरों के कंप्यूटर सिस्टम, इंटरनेट और प्रिंटिंग मशीनें बंद पड़ी हैं। इसके चलते जनता से जुड़ी कई जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्राइवेट स्कूलों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन रुक गया है, कंप्यूटर से बनने वाले सर्टिफिकेट जारी नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा जनता की शिकायतों का निपटारा और सरकारी कॉलेजों में दाखिले से जुड़े काम लटक गए हैं।
8 घंटे की शिफ्ट में से केवल 3-4 घंटे मिल रही बिजली
अधिकारियों के मुताबिक, 8 घंटे की शिफ्ट में से केवल 3 या 4 घंटे ही बिजली मिलती है। आमतौर पर सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक और फिर शाम 4 बजे के बाद बिजली पूरी तरह काट दी जाती है। निरीक्षण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि बिलों का पूरा भुगतान करने के बाद भी बिजली कंपनी ‘के-इलेक्ट्रिक’ कोई सुनवाई नहीं कर रही है।
दफ्तरों में बिजली न होने से पंखे और एसी बंद
बता दें कि है कि दफ्तरों की इमारत में बिजली न होने से पंखे और एसी बंद हैं। भीषण गर्मी और उमस के कारण कर्मचारियों का कमरों के अंदर बैठना नामुमकिन हो गया है, जिसके चलते वे बाहर खुले में बैठकर काम करने को मजबूर हैं।
दूसरी ओर, एडमिशन, स्कूल रजिस्ट्रेशन और दूसरे जरूरी काम से दफ्तरों के चक्कर काट रहे छात्र, माता-पिता, शिक्षक और स्कूल प्रिंसिपल घंटों इंतजार करने के बाद बिना काम कराए ही वापस लौटने को मजबूर हैं।

