संसद के मॉनसून सत्र की तारीखों का ऐलान हो चुका है। सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार इस सत्र में उन अहम विधेयकों (बिलों) को पारित कराने की कोशिश करेगी, जिन्हें पहले विशेष सत्र में पास नहीं कराया जा सका था। वहीं, कांग्रेस भी आगामी मॉनसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए बैठक करने वाली है। इसी बीच, पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर एक बार फिर अपनी राय रखी है। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा फिर तेज हो गई है।
पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने किया पोस्ट
शिवसेना से पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मेरी निजी राय हमेशा से परिसीमन और ऐसी संसद के पक्ष में रही है जो सच में लोगों की ताकत को दिखाए। प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ संसद और विधानसभाओं में काम के दिनों की संख्या भी बढ़नी चाहिए।
महाराष्ट्र से पूर्व सांसद ने पोस्ट में आगे लिखा कि संसद में जो संविधान संशोधन पास नहीं हो पाया, उसमें सभी राज्यों के लिए 50% आनुपातिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव था ताकि किसी भी राज्य को नुकसान न हो। यह एक सही और निष्पक्ष कदम था।
पूर्व राज्यसभा सांसद ने पोस्ट में आगे लिखा कि और एक बात याद दिला दूं कि 2023 का नारी शक्ति अधिनियम, जो सर्वसम्मति से पास हुआ था, उसमें आरक्षण से पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया शामिल थी।
उन्होंने आगे लिखा कि मैंने पहले भी कहा था और फिर दोहरा रही हूं कि पार्टियां अपने रुख पर दोबारा सोचेंगी और यह पक्का करेंगी कि जिस प्रक्रिया में पहले ही बहुत देर हो चुकी है, उसे कानून बनने के लिए जरूरी समर्थन मिले।
