धनबाद: रेलवे स्टेशन रोड स्थित सबीली मजार-मस्जिद कमेटी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बुधवार 1 जुलाई को हुई मारपीट और चोरी के आरोपों के बाद शनिवार को पूर्व कमेटी के पूर्व सचिव वाजिद खान और मस्जिद के इमाम शकील अहमद ने प्रेस वार्ता कर नई कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल वाजिद खान द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन तथा उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की।
पूर्व सचिव वाजिद खान ने कहा कि 1 जुलाई को जिला प्रशासन, पुलिस और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में नई कमेटी ने पदभार ग्रहण किया था। उस दौरान मस्जिद के इमाम आम लोगों से अपील कर रहे थे, लेकिन नई कमेटी के अध्यक्ष ने उन्हें रोकने और माइक छीनने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना मीडिया और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई थी। ऐसे में बाद में चोरी और मारपीट के लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी ओर से भी धनबाद थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
पूर्व सचिव ने कहा कि वर्ष 2025 में कल्याण विभाग द्वारा जारी एसओपी के अनुसार कमेटी में वही लोग शामिल हो सकते हैं जो मस्जिद परिसर से तीन किलोमीटर के दायरे में रहते हों और किसी प्रकार का नशा नहीं करते हों। उनका आरोप है कि नई कमेटी का गठन इन मानकों की अनदेखी कर किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मजार की जमीन रेलवे की है और यदि नई कमेटी के अध्यक्ष खुद को जमीन का मालिक बताते हैं तो वे इसके वैध दस्तावेज सार्वजनिक करें।
भड़काने के आरोपों को सिरे से किया गया खारिज
वहीं मस्जिद के इमाम शकील अहमद ने अपने ऊपर लगाए गए लोगों को भड़काने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि जुमे की नमाज के बाद लोगों से शांति, धार्मिक मर्यादा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील करना उनकी नियमित जिम्मेदारी है। नमाज के बाद क्या हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है क्योंकि वह अपने कमरे में चले गए थे। उन्होंने कहा कि घटना से उनका कोई संबंध नहीं है।
फिलहाल सबीली मजार-मस्जिद विवाद में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई कल्याण विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी।

