कई लोगों को रिश्तेदारों के ताने और बिना मांगी सलाह से परेशानी होती है। ऐसे में बहस करने की बजाय आध्यात्मिक गुरु गौरांग दास तीन आसान तरीके अपनाने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि शांत और समझदारी से जवाब देने पर रिश्तेदार धीरे-धीरे बेवजह सवाल पूछना और दखल देना बंद कर देते हैं।
गौरांग दास कहते हैं कि जब भी कोई रिश्तेदार आपसे बिना मांगे कोई सजेशन देने लगे और आप थोड़ा इरिटेट महसूस करने लगें, तो उस बहस में पड़ने की बजाय बस एक सिंपल सा जवाब दे दें ‘हां हां, देखते हैं।” फिर देखिए, मैजिक जैसा असर होता है। सामने वाले को खुद ही समझ में आ जाता है कि आपको उसकी बातों में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं है. ये रिप्लाई बहुत स्मार्ट तरीके से बातचीत को वहीं खत्म कर देता है। यही वजह है कि इसे गुरू गौरांग दास एक एपिक तरीका मानते हैं।
“बिल्कुल सही बोल रहे हैं” वाला फंडा अपना लें
वहीं जब भी आपको लगे कि सामने वाला रिलेटिव आपके साथ ऐसी बातें कर रहा है जिसका रिप्लाई देखकर भैंस के आगे बीन बजाने वाली सिचुएशन हो जाए, तब टॉपिक को वहीं खत्म करने के लिए आप “बिल्कुल सही बोल रहे हैं” वाला फंडा अपना लें , क्योंकि इससे सामने वाले को यह समझ आता है कि आप उसकी बात को इंपॉर्टेंस दे रहे हैं और फिर वह कुछ देर बाद खुद ही उस टॉपिक पर बातचीत करना बंद कर देता है, क्योंकि उसे जो आपसे जवाब चाहिए था, वह उसे मिल चुका होता है।
तीसरा जवाब- “अच्छा” होना चाहिए
छोटा सा दिखने वाला “अच्छा” एक ऐसा शब्द है जिसे अलग-अलग टोन में आप कई जगहों पर यूज्ड कर सकते हैं। आप भी इसे अपने रिलेटिव की बिन मांगी ओपिनियन को इग्नोर करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
जब भी सामने वाला उटपटांग की बातें करे, तो बस “अच्छा-अच्छा” बोलकर बात वहीं खत्म कर दें। इससे न तो सामने वाले को आपसे कोई रिएक्शन मिलेगा और न ही वह उस टॉपिक पर आगे बातचीत कर पाएगा। टॉपिक वहीं खत्म हो जाता है।
टॉक्सिक रिश्तेदारों से नहीं करें बहस
गुरु गौरांग दास ने अपने वीडियो में यह भी बताया है कि अपने रिलेटिव्स से बहस करनी ही नहीं चाहिए, क्योंकि ऐसे लोगों के साथ बहस करने से आपकी अपनी एनर्जी बर्बाद होती है। टॉक्सिक लोगों को कोई सॉल्यूशन नहीं चाहिए, बल्कि वे सिर्फ आपका रिएक्शन चाहते हैं। आप जो भी जवाब देंगे, वे उसे बढ़ा-चढ़ाकर आगे फैलाते हैं, जिससे आपके लिए सिर्फ टॉक्सिसिटी और बढ़ती है। इसलिए ऐसे लोगों को कम शब्दों में रिप्लाई देकर आगे बढ़ जाना ही बेहतर होता है।

