झरिया में ‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ मनाई गई बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती, पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश

झरिया में ‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ मनाई गई बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती, पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश

वृक्षारोपण और श्रद्धांजलि के साथ हुआ कार्यक्रम

धनबाद (झरिया): राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 189वीं जयंती झरिया में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। हेटलीबांध और मंगाली चंडी काली मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान “बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय अमर रहें” के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

कार्यक्रम के तहत पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वृक्षारोपण अभियान भी चलाया गया। आयोजकों ने बताया कि इस अभियान की अगली कड़ी के तहत घनसाडीह और केंदुआ में भी पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

‘वंदे मातरम्’ को बताया पर्यावरण चेतना का संदेश

इंस्टिट्यूशन फॉर नेशनल एमिटी (INA) के संस्थापक पिनाकी राय ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का योगदान केवल राष्ट्रीय चेतना तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ मातृभूमि के प्रति प्रेम के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि गीत में वर्णित “सुजलाम, सुफलाम, शस्यश्यामलाम” भारत की समृद्ध और हरित धरती की कल्पना है, जिसे साकार करने के लिए व्यापक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से झरिया कोयलांचल के पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष परियोजना शुरू करने की भी मांग की।

विद्यार्थियों ने गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुति से बांधा समां

कार्यक्रम में कोलफील्ड चिल्ड्रेन क्लासेज (CCC) के छात्र-छात्राओं ने कलाकार संजय पंडित द्वारा बनाई गई बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की तस्वीर के समक्ष सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया।

इसके अलावा केंदुआ की छात्राओं नंदनी साव, मुस्कान कुमारी, राधिका कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, दुर्गा कुमारी और नंदिनी कुमारी ने देशभक्ति से ओतप्रोत नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

राष्ट्रगान के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम में पिनाकी राय, मौसुमी राय, संजय पंडित, अनूप साव, श्रीराम गोराई सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। अंत में सभी ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाकर कार्यक्रम का समापन किया।

यह आयोजन देशभक्ति, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को एक साथ जोड़ने का प्रयास रहा, जिसमें युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

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