धनबाद। सीबीएसई कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणामों में री-इवैल्यूएशन के बाद कई विद्यार्थियों के अंक बढ़ने से छात्रों और अभिभावकों में खुशी का माहौल है। वहीं, अंकों में हुए बड़े बदलाव के बाद बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। धनबाद की छात्रा सिद्धि भाटिया के अकाउंटेंसी विषय में री-इवैल्यूएशन के बाद 8 अंक बढ़ गए। इसके बाद उनके अंक 86 से बढ़कर 94 हो गए। वहीं कृष्णा अग्रवाल के बिजनेस स्टडीज विषय में 9 अंक बढ़ने के बाद उनके अंक 88 से बढ़कर 97 हो गए।
री-इवैल्यूएशन के बाद छात्रों को मिली सफलता
दोनों विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर भारतीय मानवाधिकार संगठन के जिला महासचिव (शिक्षा विभाग) डॉ. मनीष शर्मा ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मेहनत को सही सम्मान मिलना खुशी की बात है, लेकिन री-इवैल्यूएशन के बाद इतने अधिक अंकों का बढ़ना प्रारंभिक मूल्यांकन प्रक्रिया में संभावित कमियों की ओर भी संकेत करता है।
मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल
डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि किसी विषय में 8 से 9 अंकों की वृद्धि यह बताती है कि उत्तर पुस्तिका के शुरुआती मूल्यांकन में कहीं न कहीं चूक हुई हो सकती है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कई कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया और मेरिट सूची पहले ही जारी हो जाती है। ऐसे में बाद में अंक बढ़ने से विद्यार्थियों को प्रवेश प्रक्रिया में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सभी विद्यार्थी नहीं करा पाते री-इवैल्यूएशन
डॉ. शर्मा ने कहा कि हर विद्यार्थी री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन नहीं करता। जानकारी की कमी, समय सीमा या अन्य कारणों से कई छात्र इस प्रक्रिया तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह संभावना बनी रहती है कि कुछ विद्यार्थियों के अंकों में सुधार की आवश्यकता होने के बावजूद वह सामने नहीं आ पाता।
CBSE से मूल्यांकन प्रक्रिया मजबूत करने की मांग
उन्होंने सीबीएसई से मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सटीक और त्रुटिरहित बनाने की मांग की। उनका कहना है कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर मूल्यांकन व्यवस्था से विद्यार्थियों का विश्वास बढ़ेगा और बोर्ड की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।

